Friday, April 19, 2013

वास्तु ज्ञान --बाथरूम में नमक रखने से नेगेटिविटी दूर होगी:Keep some Salt in the Bathroom to Kill Negative Energy



 बाथरूम में नमक रखने से नेगेटिविटी दूर होगी:Keep some Salt in the Bathroom to Kill Negative Energy

हमारे घर का मुंह पूरब की तरफ है। इसके बावजूद मेरे जीवन में कोई शांति नहीं है। हमने जबसे इस मकान में शिफ्ट किया है, तभी से मैं इमोशनली, मेंटली और फाइनेंशली समस्याएं झेल रहा हूं। कृपया कोई उपाय बताइए।
आपके घर का नक्शा देखा। इसमें बहुत कम बदलाव करने की जरूरत है, लेकिन आपने सारी चीजों को मिसमैनेज किया हुआ है। इससे आपका घर वास्तु के नियमों के विपरीत हो गया है। यह पॉजिटिव एनर्जी को बर्बाद करने की तरह है। अगर आपने इनका ध्यान रखा होता है, तो पॉजिटिव एनर्जी आपके घर में रहकर आपको लाभ दे सकती थीं। आपके घर का मुंह पूरब की तरफ है, जो बहुत शुभ होता है। इसके अलावा उत्तर दिशा में खुली जगह का होना भी वास्तु के अनुसार काफी शुभ है। पूरब मुंहाना होते हुए भी आपको वास्तु का लाभ इसलिए नहीं मिल रहा है, क्योंकि घर के एकदम बाहर बड़े-बड़े पेड़ पॉजिटिव एनर्जी का रास्ता रोक रहे हैं। घर में दो कमरे पेंटागन आकार के हैं। ये वास्तु के नियमों के विपरीत हैं। आपने घर में बोरिंग भी फायर जोन यानी दक्षिण-पूर्व दिशा में कराई है, जो गलत है। मंदिर को भी गलत जगह पर रखा गया है।


सबसे पहले बोरिंग को उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में शिफ्ट करने की कोशिश करें। इससे घर के आर्थिक हालात सुधरेंगे। घर में समृद्धि लाने के लिए आप इस हिस्से में अंडरग्राउंड वॉटर टैंक भी बनवा सकते हैं। आपके घर में पूजा घर और टॉयलेट्स बराबर में बने हुए हैं। यह वास्तु के हिसाब से बिल्कुल गलत है। आपको घर के मंदिर में ऊर्जावान 91 ग्रिड पिरामिड रखना चाहिए। इसके अलावा मंदिर में मूर्ति का मुंह दक्षिण या पश्चिम की तरफ रखें, जबकि पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व की तरफ होना चाहिए। बाथरूम में नमक का कटोरा रखें। इससे घर की नेगेटिव एनर्जी को बैलेंस करने में मदद मिलेगी। किचन की दीवार पर पूरब दिशा में एक बड़ा शीशा टांगने से घर में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होंगी। घर की बाहरी दीवार पर अष्टकोणीय शीशा इस तरह टांगें कि इसमें पेड़ों का अक्स दिखाई दे। इससे द्वार वेध दोष दूर होगा। 


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Thursday, April 18, 2013

उपाय --नौकरी में प्रमोशन!तो करे सूर्य देव को प्रसन्न :करियर में अचानक बाधाओं का आना और निवारण :Job Promotion : Obstacles to Careers and Prevention: Upay,


नौकरी में प्रमोशन!

क्या है ग्रहों का वैदिक दान, जाप व्रत और शांति उपाय?
 सूर्य: सामाजिक प्रतिष्ठा, पारिवारिक मानसम्मान,तो करे सूर्य देव को प्रसन्न। वैदिक दान, जाप, मंत्र व व्रत के माध्यम से सरल उपाय।
सूर्य
गेहूं, ताम्बे का पात्र, घी, गुड, माणिक्य, लाल वस्त्र, मसूर की दाल, लाल कनेर के अथवा कमल के पुष्प, गो दान।
मंत्र:- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नम:
व्रत:-18 रविवार का व्रत करें
भोजन:-नमक रहित गेहूं से बना भोजन करें।


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  करियर में बाधाओं के कारण और निवारण
भाग्य और परिश्रम : करियर बनता है।  ज्योतिष शास्त्र :मार्गदर्शक एवं सहयोगी। जन्मपत्रिका में द्वितीय भाव वाणी एवं ज्ञान के उपयोग का प्रदाता माना जाता है। इस भाव के श्रेष्ठ होने पर जातक सम्बन्धित क्षेत्र में जहां अपनी वाणी से सफलता प्राप्त करता है, वहीं सम्बन्धित ज्ञान का उपयोग भी पूर्ण रूप से कर पाता है।
 तृतीय भाव :उसकी रुचि एवं पराक्रम का होता है। इससे जहां जातक की किसी विषय विशेष में रुचि प्रकट होती है, वहीं यह भाव कार्यक्षेत्र के अनुकूल मानसिक दृढ़ता का भी द्योतक है।
 चतुर्थ भाव: प्राथमिक शिक्षा। पंचम भाव :उच्च शिक्षा।
 इन भावों पर शुभ प्रभाव तथा इनके स्वामियों की बली एवं शुभ स्थिति शिक्षा में सफलता दिलाने वाली होती है। इसके अतिरिक्त बुध एवं गुरु तथा शिक्षा के विषय के कारक ग्रह का भी बली एवं शुभ स्थिति में होना आवश्यक है।
यदि उक्त भावों में पापग्रह अथवा त्रिकेश स्थित हों तथा इनके स्वामी भी त्रिक भावस्थ हों, नीच या शत्रु राशिस्थ हों अथवा अस्त या वक्री हों, तो शिक्षा में बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
 यदि शिक्षा प्राप्ति में राहु, केतु या त्रिकेश की दशा-अन्तर्दशा विद्यमान हो अथवा गोचर में गुरु, शनि, राहु आदि ग्रह अशुभ फलप्रद हों, तो भी शिक्षा में बाधाएं आती हैं।
 जन्मपत्रिका में दशम भाव से कर्मक्षेत्र का विचार किया जाता है, तो शिक्षा के पंचम भाव से द्वितीय अर्थात् छठे भाव को प्रतियोगिता परीक्षा का कारक माना जाता है।
नवम भाव भाग्य का है, जिसकी परिणति उससे द्वितीय यानी दशम भाव में होती है।
 एकादश भाव आय भाव करियर से सीधा जुड़ा है।
यदि उक्त भाव पापकर्तरी में हों, उनमें त्रिकेश एवं पापग्रह उपस्थित हों, साथ ही, इन भावों के स्वामी भी निर्बल और अशुभ स्थिति में हों तथा करियर निर्माण के समय दशा-अन्तर्दशा एवं गोचर अशुभ फलप्रद हों, तो करियर निर्माण में बाधाएं आती हैं।  प्रयास करने के बावजूद मनोनुकूल करियर की प्राप्ति नहीं हो पाती।
1. मन्त्र : ऐ ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। जप संख्या : प्रतिदिन एक माला।
फल : शिक्षा एवं करियर में आ रही बाधाओं का निवारण एवं मनोकामना पूर्ति।
2. मन्त्र : ॐ  वद् वद् वाग्वादिन्यै स्वाहा।। जप संख्या : प्रतिदिन एक माला।
फल : विद्या एवं विद्वता की प्राप्ति।
3. मन्त्र : स र्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते। स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तुते।। जप संख्या : प्रतिदिन एक माला।
फल : अवांछित प्रवृतियों से छुटकारा एवं श्रेष्ठ प्रवृतियों की प्राप्ति।
4. मन्त्र : ॐ नमो भगवती पद्मावत्यै ओं ह्रीं श्रीं पूर्वाय दक्षिणाय पश्चिमाय उत्तराय अन्नपूर्णास्ति सर्वं मम वश्यं करोति स्वाहा।। (जैन पद्मावती देवी मन्त्र)
जप संख्या : प्रतिदिन एक माला।
फल : बुद्धि और रोजगार की प्राप्ति।
 5. मन्त्र :ॐ  बृं बृहस्पतये नम:। जप संख्या : प्रतिदिन एक माला।
फल : ज्ञान एवं कार्यक्षेत्र में पूर्ण सफलता की प्राप्ति।
6. इसी प्रकार बाधाकारक ग्रह के मन्त्रों के जप से बाधा दूर होती है और अनुकूलता आती है।
7. प्रतिदिन गणपति अथर्वशीर्ष एवं सरस्वती चालीसा पाठ उत्तम शिक्षा प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ हैं।
8. विद्यार्थी पुष्य नक्षत्र के दिन घर के बुजुर्ग से जिह्वा पर सोने अथवा चांदी की शलाका से पंचामृत अथवा शहद से बीज मन्त्र लिखवाएं।
9. करियर में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए मंगलवार से आरम्भ कर प्रतिदिन हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करें।
क‍रियर में सफलता की चाहत हैं, तो करे सूर्य की उपासना
 सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया हैं।सूर्य को ब्रह्म कहा गया हैं। शास्त्रों में सूर्य की प्रातः कालीन किरणों को अमृत माना गया हैं जिस से संपूर्ण विश्व का जन्म हुआ है। सूर्य ब्रह्मण्ड की क्रेन्द्र शक्ति है।  हम सभी सूर्य द्वारा अवश्य प्रभावित होते हैं।
ज्योतिष शास्त्र में इसे कालपुरूष की आत्मा और नवग्रहों का राजा कहा गया हैं।
सूर्य का ज्योतिष महत्व: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नवग्रहों में सर्वप्रथम सूर्य को ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है और इसे आत्मा, पिता और कर्म का स्वामी माना गया है।  जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में सूर्य पहले, दूसरे, पांचवे, सातवें या आठवें भाव पर विराजित हो तो व्यक्ति को इसकी शांति के लिए सूर्य उपासना करनी चाहिए।
सूर्य और संतान: काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार, व्यक्ति के पांचवे भाव पर सूर्य का अधिकार होता है। कुण्डली के पांचवे भाव से व्यक्ति का संतान पक्ष देखा जाता है, अगर व्यक्ति के पांचवे भाव में कोई क्रूर ग्रह जैसे के राहू, केतु अथवा शनि इत्यादि बैठे हो अथवा इस भाव पर किसी क्रूर ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति को संतान पक्ष से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिन व्यक्तियों को संतान नहीं होती उन्हें सूर्य साधना से निश्चित लाभ होता हैं। पिता-पुत्र अथवा पिता-पुत्री के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना करना श्रेष्ठ रहता है।
सूर्य और कॅरियर: काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार, व्यक्ति की कुण्डली का दसवां भाव सूर्य का पक्का घर माना गया है। व्यक्ति के दसवें घर से व्यक्ति के पिता, प्रोफेशन, कॅरियर, कार्यस्थल, कार्य सफलता, पितृपक्ष और प्रगति देखी जाती है। अगर व्यक्ति के दसवें भाव में कोई अनिष्टकारी घर बैठा हो, सूर्य नीच एवं किसी ग्रह से पीड़ित हो,  सूर्य को ग्रहण लगा हो तो व्यक्ति के कॅरियर में विकट समस्याएं आती हैं। व्यक्ति की प्रोफेशनल लाईफ भी मंद पड़ जाती है। जिन व्यक्तियों को नौकरी मिलने में बाधा आ रही हो अथवा कारोबार में सफलता न मिल पा रही हो और पदोन्नति में समस्याएं आ रही हो उन्हें सूर्य साधना से अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।

  • सूर्य के उपाय
  • सोने में माणिक्य रत्न जड़वाकर दाहिने हाथ की अनामिका ऊंगली में रविवार को शुभ महूर्त में धारण करें।
  • सूर्य मंत्र ॐ सूर्याय नमः का जाप प्रति रविवार को 11 बार करने से व्यक्ति यशस्वी होता हैं।
  • रविवार को गायत्री मंत्र की एक माला का जाप कर सूर्य नमस्कार करें, सूर्य को अर्ध्य दें।
  • कॅरियर में सफलता के लिए आदित्य हृदय स्त्रोत का प्रतिदिन पाठ करें।
  • लाल वस्त्र, लाल चन्दन, तांबे का बर्तन, केसर, गुड़, गेहूं का दान रविवार को करना शुभ फल प्रदान करता है।
  • रविवार काव्रत रखें, इस दिन नमक का प्रयोग न करें।
  • घर से बहार निकलने से पहले थोड़ा सा गुड़ खाएं।
  • माता पिता के पांव छुकर आशीर्वाद लें।
  यह ब्लॉग मैंने अपनी रूची के अनुसार बनाया है इसमें जो भी सामग्री दी जा रही है वह मेरी अपनी नहीं है कहीं न कहीं से ली गई है। अगर किसी के कॉपी राइट का उल्लघन होता है तो मुझे क्षमा करें।मैं हर इंसान के लिए ज्योतिष के ज्ञान के प्रसार के बारे में सोच कर इस ब्लॉग को बनाए रख रहा हूँ।

Wednesday, April 17, 2013

उपाय -नौकरी और प्रमोशन दिलाते हैं ये उपाय :इन पांचों को खिलाते रहेंगे खाना तो कभी नहीं होगी पैसों की कमी :Job and promotion assures /


नौकरी और प्रमोशन दिलाते हैं ये 4 उपाय, कोई भी 1 उपाय जरूर करें


उज्जैन। आज के समय युवाओं की सबसे बड़ी समस्या है अच्छी नौकरी, यदि किसी के पास अच्छी नौकरी है तो उसे समय पर उचित प्रमोशन या वेतन वृद्धि नहीं मिलता है। ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए व्यक्तिगत मेहनत के साथ ही चमत्कारी उपाय भी करना चाहिए।
यहां 4 प्राचीन और कारगर उपाय बताए जा रहे हैं। इन उपायों की पूरी विधि है। ये सभी उपाय जल्दी ही आपको परेशानियों को दूर करते हैं। यदि आप इन उपायों से कोई एक उपाय भी करेंगे तो आपको सकारात्मक फल अवश्य प्राप्त होंगे।
वैसे तो शास्त्रों के अनुसार कई ऐसे उपाय बताए हैं जो नौकरी से संबंधित परेशानियों का निराकरण करते हैं, लेकिन यहां पहला उपाय जानिए जो कि शनिवार के दिन किया जाना चाहिए...
पहले उपाय की विधि...
उपाय के अनुसार व्यक्ति शनिवार की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठें और सभी नित्य कर्मों से निवृत्त होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद घर में किसी पवित्र स्थान पर पूजन का विशेष प्रबंध करें या किसी मंदिर में जाएं।
शनिवार शनि की पूजा का विशेष दिन माना जाता है। शनि हमारे कर्मों का फल देने वाले देवता हैं। अत: इसी दिन शनि देव का विधिवत पूजन करना है।
पूजन करने के बाद यहां दिए गए मंत्र का जप 1008 बार करना है। जप के लिए रुद्राक्ष की माला उपयोग किया जा सकता है।
मंत्र: ऊँ नम: भगवती पद्मावती ऋद्धि-सिद्धि दायिनी दुख-दारिद्रय हारिणी श्रीं श्रीं ऊँ नम: कामाक्षाय ह्रीं ह्रीं फट् स्वाहा।
इस मंत्र का जप शांति पूर्वक करें। पूजन में थोड़ा समय लगता है अत: किसी शांत एवं पवित्र स्थान का चयन करें।
शनिवार के दिन यहां दिए मंत्र का जप 1008 बार हो जाए इसके बाद जब आप नौकरी के लिए इंटरव्यू देने जाएं तो इस मंत्र का जप 11 बार करके जाएं।
1008 बार इस मंत्र के जप से यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा और जब भी आप इसका जप 11 बार करेंगे तो यह और अधिक चमत्कारी फल प्रदान करेगा।
इसी प्रकार जब भी प्रमोशन या इंक्रिमेंट का समय आए तब इस मंत्र का जप 11 बार अवश्य करें। लाभ होगा।
नौकरी के लिए घर से निकलने के पहले 11 बार मंत्र जप के बाद अपने साथ थोड़ा सा आटा और गुड़ लेकर जाएं। रास्त्रे में जहां भी गाय दिखाई दे उसे आटा और गुड़ खिला दें। इस कार्य के बाद यह उपाय पूर्ण हो जाएगा और आपको जल्दी ही अच्छी नौकरी मिल जाएगी। प्रमोशन के रास्ते में आ रही रुकावटें दूर हो जाएंगी।

दूसरा उपाय
प्रतिदिन सुबह-सुबह सूर्य को जल अर्पित करें। जल तांबे के लोटे से चढ़ाना चाहिए, इसके साथ ही जल में लाल मिर्ची के दाने भी डालें। यह उपाय आपको प्रमोशन दिला सकता है और मनचाहे स्थान पर स्थानांतरण करवा सकता है।

तीसरा उपाय
ज्योतिष के अनुसार यदि आपको कई प्रयास करने बाद भी सही नौकरी नहीं मिल रही है तो निम्न उपाय करें। किसी भी मंगलवार को शुभ मुहूर्त में हनुमानजी का ऐसा चित्र खरीदें जिसमें उनका रंग सफेद हो।
ध्यान रहें हनुमानजी के वस्त्रों का रंग सफेद न हो। उस फोटो को घर लेकर आएं और जिस दिशा में आप सिर रखकर सोते हैं ठीक उसके सामने वाली दीवार पर हनुमानजी का फोटो लगा दें। प्रतिदिन उठने के तुरंत बाद बजरंग बली के दर्शन करें। इस प्रयोग से कुछ ही दिनों में आपको अच्छी नौकरी मिलने के योग बनेंगे।

चौथा उपाय
नौकरी या प्रमोशन की इच्छा रखने वाले लोगों को प्रतिदिन पक्षियों को मिश्रित अनाज खिलाना चाहिए। आप सात प्रकार के अनाजों को एकसाथ मिलाकर पक्षियों को खिलाएं। इसमें गेहूं, ज्वार, मक्का, बाजरा, चावल, दालें शामिल की जा सकती हैं। प्रतिदिन सुबह-सुबह यह उपाय करें, जल्दी ही नौकरी से जुड़ी इच्छाएं पूरी हो जाएंगी।
नौकरी और प्रमोशन दिलाते हैं ये 4 उपाय
कोई भी 1 उपाय जरूर करें-http://goo.gl/dspkbh

यह उपाय करने से होगा प्रमोशन

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रहते हैं। वे दिन-रात अपने काम में निखार लाने का प्रयत्न करते रहते हैं और उसमें सफल भी होते हैं लेकिन इसके बाद भी उन्हें प्रमोशन नहीं मिल पाता। जबकि कुछ लोग बिना कुछ किए ही प्रमोशन पा लेते हैं। कुछ ग्रहों के अशुभ प्रभाव के कारण ऐसा हो सकता है। यदि आप प्रमोशन चाहते हैं तो नीचे लिखे उपाय कर उन ग्रहों को शांत करें, आपका भी प्रमोशन जल्दी होगा।
उपाय
- यदि शनि आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न कर रहा है, तो एक बर्तन में तिल्ली का तेल लेकर उसमें अपनी परछाई देखकर भिखारी को दान कर दें।
- यदि सूर्य के कारण बाधा हो तो प्रतिदिन पहली रोटी गाय को दें यदि गाय काली या पीली हो तो और भी शुभ रहता है।
- चन्द्र के कारण बाधा हो तो पिता को स्वयं जाकर दूध पिलाएं और उनकी सेवा करें।
- मंगल के अशुभ प्रभाव के कारण बाधा हो तो घर में बुजुर्ग, महिलाओं का सम्मान करें और चांदी की अंगूठी या कड़ा पहनें।
- बुध ग्रह के कारण आपके प्रमोशन में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो किसी चांदी के आभूषण का दान करें।
- गुरु के प्रभाव के कारण तरक्की में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो प्रतिदिन पीली गाय को गुड़-चने खिलाएं।
- यदि शुक्रग्रह के कारण आपको बाधा हो तो रोज घर की बुजुर्ग स्त्रियों के चरण स्पर्श करें।
- राहु के प्रभाव के कारण व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो तो लाल गुंजा व सौंफ को लाल वस्त्र में बांधकर अपने कमरे में रखें।
- केतु का अशुभ प्रभाव हो तो रोज कुत्ते को तेल से चुपड़ी रोटी खिलाएं।


इन पांचों को खिलाते रहेंगे खाना तो कभी नहीं होगी पैसों की कमी
उज्जैन। आज के समय में लगभग हर इंसान किसी न किसी परेशानी का सामना कर रहा है। शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जो जीवन से पूरी तरह संतुष्ट है और सुखी है। जीवन से जुड़ी हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान शास्त्रों में बताया गया है। एक उपाय तो ये है कि हम अपनी मेहनत से और स्वयं की समझदारी से इन समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें और दूसरा उपाय यह है कि हम धार्मिक कर्म करें।
हमें प्राप्त होने वाले सुख-दुख, हमारे कर्मों का ही प्रतिफल है। यदि पुण्य कर्म किए जाए तो दुख का समय जल्दी निकल जाता है। शास्त्रों के अनुसार पांच जीव ऐसे बताए गए हैं, जिन्हें खाना खिलाने से हमारे जीवन की सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं।
यहां जानिए ये पांच जीव कौन-कौन से हैं और इन्हें खाने में क्या देना चाहिए...
गाय को खिलाएं रोटी या हरी घास
यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से गाय को रोटी खिलाएं या हरी घास खिलाएं तो बहुत चमत्कारी फल प्राप्त होते हैं। व्यक्ति की कुंडली के सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं। गाय को पूज्य और पवित्र माना जाता है, इसी वजह से गाय की सेवा करने वाले व्यक्ति को सभी सुख प्राप्त होते हैं।
पक्षियों को अनाज के दाने खिलाएं
पक्षियों को अनाज के दाने डालने पर आर्थिक मामलों में विशेष लाभ होता है। व्यवसाय करने वाले लोगों को अनिवार्य रूप से हर रोज पक्षियों को दाना अवश्य डालना चाहिए। ऐसा करने पर व्यवसाय में बढ़ोतरी होती रहती है।
दुश्मनों का भय दूर करने के लिए यह उपाय करें
यदि कोई व्यक्ति दुश्मनों से परेशान हैं और उनका भय हमेशा ही सताता रहता है तो कुत्ते को रोटी खिलाना चाहिए। नियमित रूप से जो व्यक्ति कुत्ते को रोटी खिलाता है, उसे दुश्मनों का भय कभी सताता नहीं है। कुत्ते को रोटी खिलाने से शनि के दोष भी शांत होते हैं।
कर्ज से मुक्ति चाहिए तो यह उपाय करें
कर्ज से परेशान लोग हर रोज चींटियों को शक्कर और आटा डालें। ऐसा करने पर कर्ज की समाप्ति जल्दी हो जाती है। धन संबंधी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं।
संपत्ति के मामलों में सफलता के लिए
जिन लोगों की पुरानी संपत्ति उनके हाथ से निकल गई है या कोई मूल्यवान वस्तु खो गई है तो प्रतिदिन मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाना चाहिए। ऐसा करने पर लाभ होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने पर ऐसे योग बनते हैं कि आपकी पुरानी संपत्ति पुन: आपको मिल सकती है।
इन पांचों को जो भी व्यक्ति खाना खिलाता है, उसके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।



 ये 30 बातें ध्यान रखेंगे तो नौकरी और प्रमोशन में नहीं होंगी परेशानियां
उज्जैन।


 आज के समय में काफी अधिक ऐसे लोग हैं जिनका जीवन नौकरी पर आधारित है। जो लोग जॉब या नौकरी में रहते हैं उनकी एक इच्छा हमेशा रहती है कि उन्हें समय-समय पर प्रमोशन और उचित इंक्रीमेंट मिलता रहे। इसके लिए कड़ी मेहनत भी की जाती है। काफी कम लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें मनमाफिक नौकरी और प्रमोशन हासिल हो पाता है।
- जिस तरह से वनस्पतियों को सूर्य से जीवन प्राप्त होता है, वैसे ही आशीर्वाद से आप में जीवन संचरित होता है। इसलिए बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते रहना चाहिए।
- सफलता उन्हीं के कदम चूमती है जो किसी भी समस्या या कार्य के दोनों पक्षों को देखते हैं और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं करते हैं।
- सच्चा पुरुषार्थी वही है, जो असफल रहने पर भी प्रयास में शिथिलता नहीं आने देता। और असफलताओं के बाद भी नए उत्साह से सफलता के लिए प्रयास करता है।
- खुशी, दुख, डर, प्रेम आदि भावों को प्रकट करने में जब सभी इंद्रियां हार मान बैठती हैं, तो आंसू ही उन भावों को प्रकट करने में सहायक होते हैं।
- जलती हुई लकडिय़ां अलग होने पर धुंआ फेंकती हैं। और साथ होने पर जलने लगती हैं। ऐसे ही अपनों से अलग होने वाले दुख उठाते हैं और साथ होने पर सुखी होते हैं।
- अधिक अभिमान, अधिक बोलना, त्याग का प्रभाव, गुस्सा, अपना पेट पालने की चिंता और मित्र द्रोह- ये छह तीखी तलवारें आयु को कम कर देती हैं। इनसे बचना चाहिए।
 जो सेवक आज्ञा मिलने पर स्वामी की बात का आदर नहीं करता। किसी काम में लगाए जाने पर इनकार कर देता है। अपनी बुद्धि पर गर्व करता है। उसे छोड़ देना चाहिए।
- थोड़ा भोजन करने वाले को आयु, बल, सुख, आरोग्य मिलता है। उनके बच्चे सुंदर होते हैं। इसके अलावा लोग उन पर यह आरोप भी नहीं लगाते कि वह बहुत खाने वाले हैं।
- बुढ़ापा रूप का, मृत्यु प्राणों का, नीच पुरुषों की सेवा सदाचार का, क्रोध लक्ष्मी का और अभिमान सभी का नाश कर देता है। इसलिए इनसे बचना चाहिए।
- जो आपके साथ जैसा बर्ताव करे, उसके साथ वैसा ही बर्ताव करें। कपटी के साथ कपटपूर्ण और अच्छा बर्ताव करने वाले के साथ साधु भाव से बर्ताव करें।
- बहुत खाने वाले, अकर्मण्य, सभी लोगों से वैर रखने वाले, अधिक मायावी, क्रूर और देश काल का ज्ञान न रखने वाले को कभी भी अपने घर में न ठहरने दें।
- जो हमेशा दूसरों की निंदा में लगे रहते हैं, दूसरों को दुख और आपस में फूट डालने की कोशिश में उत्साहित रहते हैं। उनसे धन का लेन-देन नहीं करना चाहिए।
- धूर्त, आलसी, डरपोक, क्रोधी पुरुष, अभिमानी, अहसान न मानने वाले और नास्तिक व्यक्ति पर कभी भी पूर्ण विश्वास नहीं करना चाहिए।
- जो धन बहुत क्लेश उठाने से, धर्म का उल्लंघन करने से या दुश्मन के सामने सिर झुकाने से मिले, उसे पाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
- यदि आप खुद को तुच्छ, निर्धन, क्षुद्र मान बैठेंगे तो आप वैसे ही हो जाएंगे। इसके विपरीत यदि खुद का आदर करते हैं तो आत्म-निर्भर हो जाएंगे और यश भी पाएंगे।
- हर चीज आपकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है क्योंकि इसी से आपकी कार्यशक्ति संचालित होती है। जरूरत है इस शक्ति को पहचानने की।
- जिसे दूसरे की सुविधा और दूसरे के साथ निभाने की दृष्टि से झुकना और राह छोड़ना नहीं आता, वह कुछ भी नहीं पा सकता। यहां तक संतोष भी नहीं।
- अहंकार को भूलकर कोमल लता की तरह आंधी तूफान का सामना करने की कोशिश करें। सफलता खुद-ब-खुद आपको गले लगा लेगी।
- विपत्ति से बढ़कर अनुभव सिखाने वाला कोई अन्य विद्यालय आज तक नहीं बना है। और विपत्ति के समय में दुख भोगने से ही सुख के मूल्य का पता चलता है।
- यह दुनिया उसी व्यक्ति को श्रेष्ठ मानती है जो कृतकार्य होकर उसे यह दिखला देता है कि इसी तरह से सफलता हासिल की जा सकती है।
- क्रोध मूर्खता से शुरू होकर पश्चाताप पर खत्म होता है। जो व्यक्ति अपने क्रोध को अपने ऊपर ही झेल लेता है, वह दूसरों के क्रोध से बच जाता है।
- गरीब वह व्यक्ति है, जिसका खर्च उसकी आमदनी से अधिक है। उस इंसान से अधिक कोई और गरीब नहीं है, जिसके पास सिर्फ पैसा है।
- जिस तरह से बिना घिसे हीरे में चमक नहीं आती, उसी तरह से बिना गलतियां करे इंसान पूर्ण नहीं होता। मगर, गलतियों पर दृढ़ केवल मूर्ख ही रहते हैं।
- बहुत विद्वान होने से कोई आत्मगौरव प्राप्त नहीं कर सकता। इसके लिए सच्चरित्र होना जरूरी है। चरित्र के सामने विद्या का बहुत कम मूल्य है।
- चिंता एक ऐसी हथौड़ी है, जो मनुष्य के सूक्ष्म और सुकोमल सूत्रों व तंतुजाल को विघटित कर उसकी कार्य करने की शक्ति को नष्ट कर देती है।
- यह मानना कि वर्तमान समय बड़ा नाजुक है, जीवन का सबसे बड़ा भ्रम है। अपने हृदय में यह अंकित कर लें कि जीवन का हर पल जीवन का सर्वोत्तम समय है।
- जीवन का पहला और स्पष्ट लक्ष्य है- विस्तार। जिस क्षण आप विस्तार करना बंद कर देंगे, उसी क्षण जान लें कि आपको मृत्यु ने घेर लिया है, विपत्तियां सामने हैं।
- ईमानदारी वैभव का मुंह नहीं देखती। वह तो परिश्रम के पालने में किलकारियां मारती है और संतोष पिता की भांति उसे देखकर तृप्त होता है।
- किसी भी व्यक्ति को सांप, आग, शेर और अपने कुल में पैदा हुए लोगों का अनादर नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये सभी बड़े तेजस्वी होते हैं।
- स्त्रियों को घर की लक्ष्मी कहा जाता है। वे अत्यंत सौभाग्यशालिनी, पूजा के योग्य, पवित्र और घर की शोभा हैं। इसलिए उनकी विशेष रूप से रक्षा करनी चाहिए।

by danik bhaskar
नौकरी पाने की बाधाओं को दूर करें ये टोटके
अच्छी नौकरी की लालसा हर किसी को होती है। कभी-कभार आप देखते होंगे कि लिखित परीक्षा और इंटरव्यू अच्छा होने के बावजूद कुछ ऐसे अड़ंगे लग जाते हैं, जिससे नौकरी मिलते-मिलते हाथ से आगे निकल जाती है। ज्योतिषियों की मानें तो ये सब ग्रहों का फेर ही होता है, जो आपके बनते काम को बिगाड़कर रख देता है। आइए, जानें लोग नौकरी के रास्ते आनेवाली बाधाओं को दूर करने के लिए कैसे-कैसे उपायों का सहारा लेते हैं-
लोग इस टोटके को भी खूब आजमाते हैं। एक नींबू में चार लौंग गाड़ दें और 'ॐ श्री हनुमते नम:' मंत्र का 108 बार जप करके नींबू को अपने उस बैग में रखें, जिसे आप साथ लेकर जा रहे हों। कहते हैं ऐसा करने से बिगड़ता हुआ काम बन जाता है।
आप घर में हनुमान जी का उड़ती हुई तस्वीर रखें और उनकी पूजा करें। हर मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर बजरंग बाण का पाठ करें। ऐसा करना नौकरी के रास्ते आनेवाली बाधाओं को दूर करता है।
यदि आप किसी इंटरव्यू के लिए जा रहे हों तो घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें। कई लोग इंटरव्यू देने जाने से पहले सुबह स्नान करते समय पानी में थोड़ी पिसी हल्दी मिलाकर स्नान करते हैं। इसके बाद भगवान के सामने 11 अगरबत्ती और घी के दीये जलाकर सबसे पहले दायां पैर घर से बाहर निकालते हैं। इंटरव्यू देने के लिए निकलने से पहले एक चम्मच दही और चीनी मुंह में जरूर रख लें।
आपने अक्सर कुछ लोगों को सुबह-सुबह पंक्षियों को दाना खिलाते देखा होगा। इसके पीछे कुछ न कुछ उनकी कामना होती है। कहते हैं यदि रोज सुबह आप पंक्षियों को सात प्रकार के अनाजों को मिलाकर दाना खिलाते हैं तो फायदा होगा।
किसी गणेश चतुर्थी के रोज गणेश जी का कोई ऐसा चित्र या मूर्ति घर में रखें या लगाएं, जिसमें उनकी सूंड़ दाईं ओर मुड़ी हो। गणेश जी की आराधना करें। भगवान के आगे लौंग तथा सुपारी रखकर मन से उनकी आराधना करें। जब भी कहीं काम पर जाना हो तो इस लौंग तथा सुपारी को साथ लेकर जाएं।
यदि आप इंटरव्यू देने के लिए निकले हों और रास्ते में यदि कोई गाय दिख जाए तो उसे आटा और गुड़ खिलाकर ही आगे बढ़ें।
शनिवार को शनि देव की पूजा करके आगे लिखे मंत्र का 108 बार जप करें।
ॐ शं शनैश्चराय नम:
महीने के पहले सोमवार को सफेद कपड़े में काले चावल लें। इसे बांधकर मां काली के चरणों में रखें। लोग कहते हैं कि नौकरी के मार्ग में आनेवाली दिक्कतें आपसे किनारा कर लेती हैं।
शनिवार को शनि देव की पूजा करें और 1008 बार इस मंत्र का जाप करें। जप के लिए रुद्राक्ष या तुलसी की माला का इस्तेमाल कर सकते हैं। फिर, जब आप इंटरव्यू के लिए निकल रहे हों तो 11 बार इस मंत्र का जप करें।
ओम नम: भगवती पद्मावती ऋद्धि-सिद्धि दायिनी
दु:ख-दारिद्रय हारिणी श्रीं श्रीं ऊँ नम:
कामाक्षय ह्रीं ह्रीं फट् स्वाहा।
 

  नौकरी में प्रमोशन चाहिए तो 7 प्रकार के अनाज का ये उपाय करें

nokri me  prmoshan ke upay
सात प्रकार के अनाज जैसे गेहूं, चावल, बाजरा, ज्वार, चने, मक्का, काली उड़द थोड़ा-थोड़ा एक साथ एकत्र करें। इसके बाद इस अनाज को प्रतिदिन सुबह-सुबह पक्षियों को खिलाएं। पक्षियों को खिलाने के लिए आप अपने घर की छत पर या किसी पार्क में यह अनाज फैला सकते हैं। जिससे पक्षी अनाज के दाने चुग लेंगे।
शास्त्रों के अनुसार पक्षियों को अनाज खिलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पिछले समय में या जन्म में किए गए पाप कर्मों का प्रभाव समाप्त होता है और पुण्य में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ आपके जीवन की कई प्रकार की समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाएंगी। आपकी नौकरी में आ रही बाधाएं भी कम हो जाएंगी और मेहनत और कार्य-कौशल के आधार पर आपको प्रमोशन और इंक्रीमेंट अवश्य मिलेगा।
 इस प्रकार यह उपाय प्रतिदिन या समय-समय पर करते रहना चाहिए। पक्षियों को अनाज खिलाने से आपकी कुंडली के दोष और घर के वास्तु दोष शांत हो जाएंगे। इसके साथ ही पक्षियों के चहचहाहट से घर के आसपास का वातावरण भी पॉजिटिव हो जा ता है |

Tuesday, April 16, 2013

जीविकोपार्जन बाधा योग (नौकरी एवं व्यवसाय): सरसो तेल से शिवलिंग का अभिषेक करें

जीविकोपार्जन बाधा योग (नौकरी एवं व्यवसाय)    



1.    आप जिस संस्थान मे नौकरी करते है, वहा आपके शत्रु आपके विरोध मे कोई न कोई षडयंत्र रचते रहते हैं तो आप किसी शनि अमावस्या को भगवान शिव से अपने शत्रु शमन का निवेदन करते हुए सरसो तेल से शिवलिंग का अभिषेक करें। इस उपाय से आपके शत्रुओ का शमन अत्यंत तीव्र गति से होगा। 
2.    यदि आपके कर्मक्षेत्र में कोई न कोई बाधा आती रहती है तो आप मंगलवार को किसी भी सिद्ध हनुमान मन्दिर में जाकर एक पान के पत्ते पर मक्खन, सिन्दूर, गुड, कर्पूर एवं 11 चने के दाने रखकर एक जनेउ के जोडे के साथ प्रभु को अपनी समस्या निवेदन करते हुए अर्पित करे और यह समस्त सामग्री प्रभू के चरणो मे रखकर श्री बजरंगबाण का पाठ करते हुए प्रभू के बाये चरण का सिन्दूर लेकर तिलक करे। आपके द्वारा यह उपाय करते ही आपको चमत्कारिक रुप से लाभ होता दिखाई देगा। 
3.    यदि आपके कर्मक्षेत्र मे आपकी उन्नति नहीं हो पा रही हो तो, आप निम्न उपाय करे - किसी भी पूर्णिमा के दिन शिव मन्दिर मे शिवलिंग को दूध से स्नान करवाये तथा मा दुर्गा को पीली चुनरी भेंट करे।

महाशिवरात्रिः छोटे-छोटे उपाय :शिवरात्रि का महत्व : Importance of Shivratri :बेल पत्र :शिवलिंग का रहस्य...:भाग्यवृद्धि के लिए :पुत्र प्राप्ति के लिए :ग्रह दोष निवारण के लिए :Importance of Shivratri :Astro Uncle :


महाशिवरात्रिः छोटे-छोटे उपाय सुख-समृद्धि लाएं

  महाशिवरात्रि के दिन किए जाने वाले उपाय महत्वपूर्ण व शीघ्र फलदायी होते हैं। इस दिन भोलेनाथ प्रसन्न हो वरदान अवश्य देते हैं। इसके महत्व को समझते हुए भोलेनाथ की कृपा से समस्याओं से निजात हासिल की जा सकती है। कोई भी प्रयोग महाशिवरात्रि के दिन, किसी भी समय कर सकते हैं। मुंह उत्तर/पूर्व की ओर करके पूजा स्थान पर बैठें। ऊन का आसन होना चाहिए। लकड़ी की चौकी पर लाल सूती वस्त्र बिछाना चाहिए। दूसरी चौकी पर शिव परिवार का चित्र/ शिव यंत्र व थाली में चंदन से बड़ा बनाकर अवश्य रखें। के मध्य में यंत्र या प्रतिमा रखें। पुष्प, माला, मौली, बेलपत्र, धतूरा अवश्य रखें। चंदन केसर मिश्रित जल से यंत्र/प्रतिमा का अभिषेक कर स्वच्छ जल से धोकर स्वच्छ कपड़े से पोंछ कर स्थापित करना चाहिए। भाग्यवृद्धि के लिए :-

Astro Uncle : Importance of Shivratri :शिवरात्रि का महत्व
* किसी गहरे पात्र में पारद शिवलिंग स्थापित करें। पात्र को सफेद वस्त्र पर स्थापित करें। नम: शिवाय मंत्र का ठीक आधे घंटे तक जाप करते हुए जलधारा पारद शिवलिंग पर अर्पित करें। अर्पित जल को बाद में किसी पवित्र वृक्ष की जड़ में डाल दें। शिवलिंग पूजा स्थान में स्थापित करें और नित्य नियम से मंत्र का जाप करें।
* यदि ग्यारह सफेद एवं सुगंधित पुष्प लेकर चौराहे के मध्य प्रात: काल सूर्योदय से पूर्व रख दिए जाएं, तो ऐसे व्यक्ति को अचानक धन लाभ की प्राप्ति की संभावना बनती है। यदि यह उपाय करते वक्त या उपाय करने के लिए घर से निकलने समय कोई सुहागिन स्त्री दिखाई दे, तो निश्चय ही धन-समृद्धि में वृद्धि होती है। चौराहे के मध्य में गुलाब के इत्र की शीशी खोलकर इत्र डालकर वहीं छोड़ आएं, तो ऐसे भी समृद्धि बढ़ती जाती है। जो महाशिवरात्रि पर न कर पाएं, वह शुक्ल पक्ष के दूसरे शुक्रवार को यह उपाय कर समृद्ध बन सकता है।
* एक बांसुरी को लाल साटन में लपेटकर व पूजनकर तिजोरी में स्थापित किया जाए, तो व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है।
नजर से बचने के लिए :- जिस व्यक्ति को नजर लगी हो या बार-बार नजर लग जाती हो तो उस व्यक्ति के ऊपर से मीठी रोटी उसारकर ढाक के पत्ते पर रखकर चौराहे के मध्य में प्रात:काल सूर्योदय से पूर्व रखना चाहिए। मीठी रोटी को रखने के बाद उसके चारों ओर सुगंधित फूल की माला रख देनी चाहिए। यह याद रखें कि जिस व्यक्ति को जल्दी-जल्दी नजर लगती हो उन्हें चौराहे के ठीक मध्य भाग से नहीं गुजरना चाहिए।
ग्रह दोष निवारण के लिए :- पहले जान लें कि किस ग्रह के कारण बाधाएं जीवन में आ रही हैं। उस ग्रह से संबंधित अनाज लेकर ढाक के पत्ते पर रखकर चौराहे के मध्य में रखना चाहिए तथा उसके चारों ओर सुगंधित पुष्पमाला चढ़ानी चाहिए। विभिन्न ग्रहों से संबंधित अनाज इस प्रकार हैं। महाशिवरात्रि पर सूर्योदय से पूर्व ग्रह से संबंधित अनाज रख कर आएं। ध्यान रखें कि अनाज की मात्रा 250 ग्राम से कम न हो। जिस चौराहे पर वर्षा ऋतु में जल का भराव हो जाता हो, उस चौराहे पर उपाय नहीं करने चाहिए। वहां अभीष्ट फल की प्राप्ति नहीं होती।
पुत्र प्राप्ति के लिए :- पश्चिम दिशा में मुंह करके पीले आसन पर बैठें। जहां तक हो सके पीले वस्त्र पहनें। लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछा कर एक ताम्रपत्र में ‘संतान गोपाल यंत्र’ तीन कौड़ियां, एक लग्न मंडप सुपारी स्थापित करें, केसर का तिलक लगाएं। पीले फूल चढ़ाएं व भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप का ध्यान करें व स्फटिक माला से प्रतिदिन 5 माला जप निम्न मंत्र का करें।
देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगत्पये
देहि में तनयं कृष्णत्वा महं शरणागते।
अब सब सामग्री की पोटली में बांधकर पूजा स्थान में रख दें। रोज श्रद्धा से दर्शन करें। जब आपकी मनोकामना पूर्ण हो जाए, तब पोटली को जल में प्रवाहित कर दें। भगवान शिव कू कृपा से सुंदर, दीर्घायु, ऐश्वर्यवान पुत्र की प्राप्ति होगी। इस शुभ अवसर का लाभ अवश्य उठाना चाहिए। 
कॅरियर और रुद्राक्ष :- जीवन में सफलता के लिए नवग्रह रुद्राक्ष माला सवरेतम है। किसी कारणवश जो इस अवसर पर रुद्राक्ष न पहन सकें, तो वे श्रावण माह में अवश्य धारण कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। रुद्राक्ष बिल्कुल शुद्ध होना चाहिए।
* राजनेताओं को पूर्ण सफलता के लिए तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए।
* न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े लोग एक व तेरह मुखी रुद्राक्ष दोनों ओर चांदी के मोती डलवा कर पहनें ।
* वकील चार व तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
* बैंक मैनेजर ग्यारह व तेरह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* सीए आठ व बारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* पुलिस अधिकारी नौ व तेरह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* डॉक्टर, वैद्य नौ व ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* सर्जन दस, बारह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* चिकित्सा जगत के लोग 3 व चार मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* मैकेनिकल इंजीनियर दस व ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* सिविल इंजीनियर आठ व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सात व ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर चौदह व गौरी शंकर रुद्राक्ष पहनें।
* कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर नौ व बारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* पायलट, वायुसेना अधिकारी दस व ग्यारह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* अध्यापक छह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* ठेकेदार ग्यारह, तेरह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* प्रॉपर्टी डीलर एक, दस व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* दुकानदार दस, तेरह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* उद्योगपति बारह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
* होटल मालिक एक, तेरह व चौदह मुखी रुद्राक्ष पहनें।
विद्यार्थियों व बच्चों की शिक्षा के लिए ‘गणोश रुद्राक्ष’ धारण करवाएं। बच्चा स्वयं अच्छी शिक्षा में नाम कमाएगा। इसे शुभ मुहूर्त में धारण करें। 



पवन जी ने पवन सिन्हा लाइव में महाशिवरात्रि के बारे में कुछ रोचक बातें बतायी जिसे हम अभी जानेंगे :

* भगवान् शिव कि अराधना अत्यंत सरल होती है परन्तु उसके फल विलक्षण होते है , एक तरफ योगी और संत भगवान् शिव कि अराधना करते है मोक्ष कि प्राप्ति के लिए तो दूसरी ओर हम जैसे लोग जो भौतिक जीवन से जुड़े हुए है वह भी करते है सभी प्रकार के कष्टो को हरने के लिए ।
* शनि गृह कि पीड़ा हो तो शिव जी कि अराधना कि जाती है , राहु गृह का उपाय , कालसर्प पूजा में सबसे बड़ा भाग शिव पूजा को ही दिया जाता है , विवाह सम्बंधी कार्य हो तो शिव अर्चना , मंगल गृह के बुरे प्रभाव के लिए भी शिव पूजा कि जाती है , मन कमजोर हो रहा है , या फिर मन कि अशांति है तब भी शिव पूजा ही कि जाती है ।
* महाशिवरात्रि का व्रत कोई भी कर सकता है , अगर महाशिवरात्रि कि रात पूरी जागकर , पूजा अर्चना भजन गाकर बितायी जाए तो बहुत अच्छे फल देने वाला व्रत है यह ।
* इस दिन दान , शिवलिंग का जलाभिषेक , पूजा इत्यादि किया जाता है ।
* पवन जी ने एक बड़ी ही रोचक बात बतायी कि हम में से बहुत लोगो को यह स्पष्ट नहीं होता कि घर में शिवलिंग कि स्थपना कर सकते है या नहीं , पवन जी कहते है कि शिवलिंग कि स्थापना घर में करनी चाहिए , इसके साथ साथ अपने व्यवसाय के स्थान पर भी करनी चाहिए अच्छे फल प्राप्त करने के लिए ।
* आमतौर पर दो तरह के शिवलिंग मिलते है , पारद शिवलिंग और स्फटिक शिवलिंग , दोनों तरह के शिवलिंग कि स्थापना आप कर सकते है ।
* पारद और स्फटिक शिवलिंग गृहस्थ लोगो और व्यवसाय करने वाले के लिए शुभ फल देने वाले होते है अगर उनकी विधिवत पूजा अर्चना कि जाए तो ।
* पारद शिवलिंग कि पूजा करने से व्यक्ति को अच्छा स्वस्थ्य , मन कि शान्ति , आयु एवं आरोग्य कि प्राप्ति होती है ।
* वही स्फटिक शिवलिंग कि पूजा करने से व्यक्ति को धन और यश मिलता है ।
* पहले जो भी शिवलिंग आप स्थापित करना चाहते है उनको आसान प्रदान करे जो स्वच्छ हो , फिर मन ही मन भगवान् शिव का आवाहन करे , उनसे प्रार्थना करे , उनके किसी भी मंत्र का जाप करे (जाप के बारे में नीचे पड़े) , आमतौर पर महा-मृत्युंजय मंत्र जप सकते है , फिर गंगाजल से स्नान कराये , उसके उपरांत पंचामृत से स्नान करवाये (पंचामृत में दूध दही घी शक्कर और मधु डालता है) , इसके उपरान्त सफ़ेद चन्दन शिवलिंग पर लगाये , फूल बेल पत्र धूप दीप आदि प्रदान करे और शिव आरती गाये ।
* आपने बहुत बारी सुना होगा कि शिव के पंचाक्षरी मंत्र से पूजा करनी चाहिए , पंचाक्षरी मंत्र होता है नमः शिवाय , जब आप साधारण पूजा करते है , या फिर शिवलिंग पर है तो आप पंचाक्षरी मंत्र का ही जप करना चाहिए , जब आप नमः शिवाय से पहले ॐ लगते है तो पूरा मंत्र बनता है ॐ नमः शिवाय , ॐ नमः शिवाय से आप शिव जी कि तब पूजा करते है जब आपकी पूजा का लक्ष्य हो शान्ति एवं शिव साधना ।
* शिव मंत्रो के जप रुद्राक्ष कि माला पर करने चाहिए ।
  * विवाह कार्य विशेष के लिए कि गयी पूजा शिव मूर्ति कि करनी चाहिए शिवलिंग कि नहीं ।
* शिवलिंग पर बेल पत्र , सफ़ेद पुष्प इत्यादि अर्पण करने चाहिए , शिव जी को सफ़ेद चन्दन अति प्रिय है इसीलिए सफ़ेद चन्दन उन्हें अवश्य लगाना चाहिए ।
* संतान दोष है या फिर संतानोत्पत्ति में कठिनाई आ रही है तो शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करना चाहिए ।
* शनि के पुष्प श्राप मुक्ति के लिए शिवलिंग पर अर्पित करे ।
* यश प्राप्ति के लिए सफ़ेद चन्दन चढ़ये ।
* सूर्यास्त के बाद शिवलिंग पर जल एवं दूध अर्पित नहीं करना चाहिए ।
* शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए ।
* द्वादश ज्योतिर्लिंग का नाम लेने मात्र से धन आदि कि समस्या से छुटकारा मिलता है :

- ॐ बैद्यनाथाय नमः ।
- ॐ भीमशंकराय नमः ।
- ॐ केदारनाथाय नमः ।
- ॐ महाकालेश्वराय नमः ।
- ॐ मल्लिकार्जुनाय नमः ।
- ॐ ओम्कारेश्वराय नमः ।
- ॐ सोमनाथाय नमः ।
- ॐ त्रयंबकेश्वराय नमः ।
- ॐ रामेश्वराय नमः ।
- ॐ नागेश्वराय नमः ।
- ॐ ग्रिष्नेश्वराय नमः ।
- ॐ विश्वनाथाय नमः ।
 shared Astro Uncle ke Aasan Upay's 
  शिवरात्रि के दिन सभी राशि के लोग ये उपाय कर सकते हैं...
- शिवरात्रि पर किसी गरीब व्यक्ति को गेहूं एवं चने की दाल का दान करें।
- किसी जरूरतमंद एवं गरीब सुहागन स्त्री को भोजन कराएं। यदि आप सुहागन स्त्री को भोजन कराने असमर्थ हैं तो किसी छोटी कन्या को भी भोजन करवा सकते हैं।
- इस दिन शिवलिंग पर चने की दाल अर्पित करें।
शिवरात्रि पर जो भी विवाहित व्यक्ति ये तीनों उपाय या इन तीनों उपायों में से कोई एक उपाय भी करता है तो उसके वैवाहिक जीवन की समस्याएं समाप्त हो जाती हैं। पति-पत्नी के बीच आपसी तालमेल और प्रेम बढ़ता है।
मेष- इस राशि के लोग शिवलिंग पर कच्चा दूध एवं दही अर्पित करें। इसके साथ ही भोलेनाथ को धतुरा अर्पित करें। कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें।
वृषभ- वृष राशि के लोग किसी भी शिव मंदिर जाएं और भगवान शिव को गन्ने के रस से स्नान करवाएं। इसके बाद मोगरे का ईत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। अंत में भगवान को मिठाई का भोग लगाएं एवं आरती करें।
मिथुन- आप स्फटिक के शिवलिंग की पूजा करेंगे तो सर्वश्रेष्ठ रहेगा। यदि स्फटिक का शिवलिंग उपलब्ध न हो तो किसी अन्य शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है। इस दिन मिथुन राशि के लोग लाल गुलाल, कुमकुम, चंदन, ईत्र आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। आक के फूल अर्पित करें। मीठा भोग लगाकर आरती करें।
कर्क- इस राशि के लोग अष्टगंध एवं चंदन से शिवजी का अभिषेक करें। आटे से बनी रोटी का भोग लगाकर शिवलिंग का पूजन करें। बैर अर्पित करें।
सिंह- इस राशि के लोगों को फलों के रस के साथ, पानी में चीनी घोलकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही शिवजी को आक के पुष्प अर्पित कर मीठा भोग लगाएं।
कन्या- आप महादेव को बैर, धतुरा, भांग और आक के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही बिल्व पत्र पर नैवेद्य रखकर अर्पित करें। कर्पूर मिश्रित जल से अभिषेक कराएं।
तुला- तुला राशि के लोग जल में अलग-अलग फूल डालकर, उस जल से शिवजी का अभिषेक करें। इसके बाद बिल्व पत्र, मोगरा, गुलाब, चावल, चंदन आदि भोलेनाथ को अर्पित करें। अंत में आरती करें।
वृश्चिक- इन लोगों को शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शहद, घी से स्नान कराने पश्चात पुन: जल से स्नान कराएं एवं पूजन कर आरती करें।
धनु- धनु राशि के लोग शिवजी को सूखे मेवे का भोग लगाएं। बिल्व पत्र, गुलाब आदि अर्पित करके आरती करें।
मकर- आप गेहूं लेकर किसी शिव मंदिर जाएं। वहां गेंहू से शिवलिंग को ढंककर, विधिवत पूजन करें। पूजन-आरती पूर्ण होने के बाद गेंहू का दान कर दें। इस उपाय से आपकी सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
कुंभ- ये लोग सफेद और काले तिल एक साथ किसी ऐसे शिवलिंग पर चढाएं, जो एकांत में हो। शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पहले जल अर्पित करें। इसके बाद काले-सफेद तिल अर्पित करें, पूजन के आद आरती करें।
मीन- इस राशि के लोगों को किसी ऐसे शिवलिंग का पूजन करना चाहिए जो पीपल के नीचे स्थित हो। यदि आपके घर के आसपास ऐसा शिवलिंग न हो तो किसी पीपल के नीचे स्वयं छोटा सा शिवलिंग स्थापित कर पूजन करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए बिल्व पत्र चढ़ाएं तथा आरती करें।
Dainik Bhaskar
 महाशिवरात्रि पर ऐसे चढ़ाएंगे बिल्व पत्र तो आप भी हो जाएंगे मालामाल
उज्जैन। जो लोग शिवजी के भक्त हैं, उनके लिए इस सप्ताह गुरुवार, 27 फरवरी 2014 को विशेष योग आ रहा है। इस दिन शिवरात्रि है। शिवरात्रि पर किए गए पूजन और उपायों से शिवजी बहुत ही जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से इतना पुण्य प्राप्त होता है, जितना वर्षभर की गई पूजा से प्राप्त होता है।
बिल्व पत्र के बिना शिव पूजा नहीं होती है पूर्ण
शास्त्रों में शिवजी के लिए कई प्रकार की पूजन विधियां बताई गई हैं। इन विधियों में कुछ कठिन भी हैं और कुछ बहुत सरल। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से शिवलिंग पर जल अर्पित करता है तो उसे भी शिव कृपा प्राप्त हो जाती है। शिवजी को प्रसन्न करने के लिए एक और सबसे सरल उपाय बताया गया है, शिवलिंग पर बिल्व पत्र अर्पित करना। शिवजी के पूजन में बिल्व पत्र का विशेष महत्व है। बिल्व पत्र अर्पित किए बिना महादेव की पूजा पूर्ण नहीं हो सकती है। मान्यता है कि सिर्फ बिल्व पत्र चढ़ाने से भी व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं, पैसों की तंगी दूर होती है।
बिल्व वृक्ष के ऐसे पूजन से होते हैं मालामाल

शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष महादेव का रूप है। तीनों लोकों में जितने पुण्य-तीर्थ हैं, वे सभी तीर्थ बिल्व के मूलभाग में निवास करते हैं। जो मनुष्य बिल्व वृक्ष के मूलभाग में महादेव का ध्यान करते हुए पूजन करता है, उसे शिवजी की कृपा प्राप्त होती है।
बिल्व वृक्ष के पूजन के लिए गंध, पुष्प, कुमकुम, प्रसाद आदि पूजन सामग्री विशेष रूप से रखना चाहिए। ऐसे पूजन से कोई कंगाल व्यक्ति भी मालामाल हो सकता है।
शिवरात्रि पर बिल्व वृक्ष की जड़ के समीप दीपक जलाएं। ऐसा करने पर शिवजी की असीम कृपा प्राप्त होती है।
शिवरात्रि पर करें खीर और घी का उपाय
जो लोग शिवरात्रि के दिन किसी बिल्व वृक्ष के पास खड़े होकर खीर और घी का दान करते हैं, वे कभी भी गरीब नहीं होते हैं। ऐस लोग जीवनभर सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त करते हैं।
जो भक्त बिल्व वृक्ष की शाखा थामकर अपने हाथ से नए-नए पल्लव उतारता है और उनसे बिल्व वृक्ष की पूजा करता है, वह सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
शिवरात्रि पर बिल्ब वृक्ष के समीप किसी शिव भक्त को भोजन कराएं। इस उपाय से भी पैसों की तंगी दूर हो जाती है।
बिल्व वृक्ष का परिचय
बिल्व वृक्ष मध्यम आकार का होता है और इसमें कांटे भी होते हैं। इस वृक्ष की पत्तियां मुख्य रूप से तीन-तीन की संख्या में जुड़ी रहती हैं। इन तीन पत्तों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है। वृक्ष की पत्तियां तीन-तीन के साथ ही पांच-पांच के गुच्छे में भी लगती हैं। पांच-पांच के गुच्छे वाली पत्तियां आसानी से मिल नहीं पाती हैं। बिल्व का फूल सफेद रंग का होता है। इसके फल गोल आकार के और सख्त होते हैं। ये फल खाने में स्वादिष्ट एवं मधुर सुंगध वाले होते हैं।
शिवपुराण के अनुसार बिल्व वृक्ष के मूल में जो भक्त महादेव का पूजन करता है, उसका निश्चय ही कल्याण हो जाता है। जो भी व्यक्ति नियमित रूप से बिल्व वृक्ष पर जल अर्पित करता है उसे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस वृक्ष के फूल, पत्ते और फलों का उपयोग कई प्रकार की औषधियों में किया जाता है।
बिल्व पत्र तोड़ने के नियम
शिवजी को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय हैं और इसी वजह से शिव पूजन में इनका स्थान महत्वपूर्ण है। बिल्व पेड़ से पत्ते तोड़ने से पहले निवेदन करें कि आप किस उद्देश्य से बिल्व पत्ते तोड़ रहे हैं। इसके बाद बिल्व पत्रों को तोडकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शिव कृपा जल्दी प्राप्त होती है। किसी भी माह की अष्टमी, चर्तुदशी, अमावस्या, पूर्णिमा तिथि एवं सोमवार को बिल्वपत्र नहीं तोडऩा चाहिए।
सोमवार शिवजी का प्रिय दिवस होता हैं। इसलिए एक दिन पूर्व का तोड़े हुए बिल्व पत्र शिवजी पर अर्पित करें। बाजार से खरीदकर लाए हुए बिल्वपत्र किसी भी दिन शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं। बिल्व पत्र को छह माह तक बासी नहीं माना जाता है। ये पत्ते प्रतिदिन धोकर पुन: शिवजी को अर्पित किए जा सकते हैं।

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बेल पत्र के औषधीय प्रयोग ----
- बेल पत्र के सेवन से शरीर में आहार के पोषक तत्व
अधिकाधिक रूप से अवशोषित होने लगते है |
- मन एकाग्र रहता है और ध्यान केन्द्रित करने में
सहायता मिलती है |
- इसके सेवन से शारीरिक वृद्धि होती है |
- इसके पत्तों का काढा पीने से ह्रदय मज़बूत होता है |
- बारिश के दिनों में अक्सर आँख आ जाती है
यानी कंजक्टिवाईटीस हो जाता है . बेल पत्रों का रस
आँखों में डालने से ; लेप करने से लाभ होता है |
- इसके पत्तों के १० ग्राम रस में १ ग्रा. काली मिर्च
और १ ग्रा. सेंधा नमक मिला कर सुबह दोपहर और शाम
में लेने से अजीर्ण में लाभ होता है |
- बेल पत्र , धनिया और सौंफ सामान मात्रा में ले कर
कूटकर चूर्ण बना ले , शाम को १० -२० ग्रा. चूर्ण
को १०० ग्रा. पानी में भिगो कर रखे , सुबह छानकर
पिए | सुबह भिगोकर शाम को ले, इससे प्रमेह और प्रदर
में लाभ होता है | शरीर की अत्याधिक गर्मी दूर
होती है |
- बरसात के मौसम में होने वाले सर्दी , खांसी और बुखार
के लिए बेल पत्र के रस में शहद मिलाकर ले |
- बेल के पत्तें पीसकर गुड मिलाकर गोलियां बनाकर रखे.
इसे लेने से विषम ज्वर में लाभ होता है |
- दमा या अस्थमा के लिए बेल
पत्तों का काढा लाभकारी है|
- सूखे हुए बेल पत्र धुप के साथ जलाने से वातावरण शुद्ध
होता है|
- पेट के कीड़ें नष्ट करने के लिए बेल पत्र का रस लें|
- एक चम्मच रस पिलाने से बच्चों के दस्त तुरंत रुक जाते है
- संधिवात में बेल पत्र गर्म कर बाँधने से लाभ मिलता है
|- महिलाओं में अधिक मासिक स्त्राव और श्वेत प्रदर के
लिए और पुरुषों में धातुस्त्राव हो रोकने के लिए बेल
पत्र और जीरा पीसकर दूध के साथ पीना चाहिए|


 बेल या बिल्ब से अपने सूरज ग्रह को भी ठीक करे
जो रोगों का नाश करे वह बिल्व। बेल के विधिवत सेवन से शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है। बेल की जड़, शाखाएँ, पत्ते, छाल और फल, सब-के-सब औषधियाँ हैं। बेल में हृदय का बल और दिमाग का ताजगी देने के साथ सात्त्विक शांति प्रदान करने का भी श्रेष्ठ गुण है। यह स्निग्ध, मुलायम और उष्ण होता है। इसके गूदे, पत्तों तथा बीजों में उड़नशील तेल पाया जाता है, जो औषधीय गुणों से भरपूर होता है। कच्चे और पके बेलफल के गुण तथा उससे होने वाले लाभ अलग-अलग प्रकार के होते हैं।

कच्चा बेलफल भूख व पाचनशक्ति बढ़ाने वाला तथा कृमियों का नाश करने वाला। यह मल के साथ बहने वाले जलयुक्त भाग का शोषण करने वाले होने के कारण अतिसार रोग में अत्यन्त हितकर है। इसके नियमित सेवन से कॉलरा (हैजा) से रक्षण होता है।
आयुर्वेद में बेल को स्वास्थ्य के लिए काफी लाभप्रद फल माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। बेलफल बेहद पौष्टिक और कई बीमारियों की अचूक औषधि है। इसका गूदा खुशबूदार और पौष्टिक होता है।
बेल के फल के 100 ग्राम गूदे का रासायनिक विश्लेषण इस प्रकार है- नमी 61.5 प्रतिशत, वसा 3 प्रश, प्रोटीन 1.8 प्रश, फाइबर 2.9 प्रश, कार्बोहाइड्रेट 31.8 प्रश, कैल्शियम 85 मिलीग्राम, फॉस्फोरस 50 मिलीग्राम, आयरन 2.6 मिलीग्राम, विटामिन 'सी' 2 मिलीग्राम। इनके अतिरिक्त बेल में 137 कैलोरी ऊर्जा तथा कुछ मात्रा में विटामिन 'बी' भी पाया जाता है।
आयुर्वेद के अनुसार पका हुआ बेल मधुर, रुचिकर, पाचक तथा शीतल फल है। कच्चा बेलफल रुखा, पाचक, गर्म, वात-कफ, शूलनाशक व आंतों के रोगों में उपयोगी होता है। बेल का फल ऊपर से बेहद कठोर होता है। इसे नारियल की तरह फोड़ना पड़ता है। अंदर पीले रंग का गूदा होता है, जिसमें पर्याप्त मात्रा में बीज होते हैं। गूदा लसादार तथा चिकना होता है, लेकिन खाने में हल्की मिठास लिए होता है। ताजे फल का सेवन किया जा सकता है और इसके गूदे को बीज हटाकर, सुखाकर, उसका चूर्ण बनाकर भी सेवन किया जा सकता है।
उदर विकारों में बेल का फल रामबाण दवा है। वैसे भी अधिकांश रोगों की जड़ उदर विकार ही है। बेल के फल के नियमित सेवन से कब्ज जड़ से समाप्त हो जाती है। कब्ज के रोगियों को इसके शर्बत का नियमित सेवन करना चाहिए। बेल का पका हुआ फल उदर की स्वच्छता के अलावा आँतों को साफ कर उन्हें ताकत देता है।
मधुमेह रोगियों के लिए बेलफल बहुत लाभदायक है। बेल की पत्तियों को पीसकर उसके रस का दिन में दो बार सेवन करने से डायबिटीज की बीमारी में काफी राहत मिलती है।
रक्त अल्पता में पके हुए सूखे बेल की गिरी का चूर्ण बनाकर गर्म दूध में मिश्री के साथ एक चम्मच पावडर प्रतिदिन देने से शरीर में नए रक्त का निर्माण होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।
गर्मियों में प्रायः अतिसार की वजह से पतले दस्त होने लगते हैं, ऐसी स्थिति में कच्चे बेल को आग में भून कर उसका गूदा, रोगी को खिलाने से फौरन लाभ मिलता है।
गर्मियों में लू लगने पर बेल के ताजे पत्तों को पीसकर मेहंदी की तरह पैर के तलुओं में भली प्रकार मलें। इसके अलावा सिर, हाथ, छाती पर भी इसकी मालिश करें। मिश्री डालकर बेल का शर्बत भी पिलाएं तुरंत राहत मिलेगी।
जानिए, शिवलिंग का रहस्य...
Webdunia



आमतौर पर शिवलिंग को गलत अर्थों में लिया जाता है, जो कि अनुचित है या उचित यह हम नहीं जानते। वायु पुराण के अनुसार प्रलयकाल में समस्त सृष्टि जिसमें लीन हो जाती है और पुन: सृष्टिकाल में जिससे प्रकट होती है उसे लिंग कहते हैं। इस प्रकार विश्व की संपूर्ण ऊर्जा ही लिंग की प्रतीक है।
वस्तुत: यह संपूर्ण सृष्टि बिंदु-नाद स्वरूप है। बिंदु शक्ति है और नाद शिव। यही सबका आधार है। बिंदु एवं नाद अर्थात शक्ति और शिव का संयुक्त रूप ही तो शिवलिंग में अवस्थित है। बिंदु अर्थात ऊर्जा और नाद अर्थात ध्वनि। यही दो संपूर्ण ब्रह्मांड का आधार है। इसी कारण प्रतीक स्वरूप शिवलिंग की पूजा-अर्चना की जाती है।
 ब्रह्मांड का प्रतीक ज्योतिर्लिंग : शिवलिंग का आकार-प्रकार ब्रह्मांड में घूम रही हमारी आकाशगंगा की तरह है। यह शिवलिंग हमारे ब्रह्मांड में घूम रहे पिंडों का प्रतीक है, कुछ लोग इसे यौनांगों के अर्थ में लेते हैं और उन लोगों ने शिव की इसी रूप में पूजा की और उनके बड़े-बड़े पंथ भी बन गए हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने धर्म को सही अर्थों में नहीं समझा और अपने स्वार्थ के अनुसार धर्म को अपने सांचे में ढाला।

शिवलिंग का अर्थ है भगवान शिव का आदि-अनादी स्वरूप। शून्य, आकाश, अनन्त, ब्रह्माण्ड और निराकार परमपुरुष का प्रतीक होने से इसे लिंग कहा गया है। स्कन्दपुराण में कहा है कि आकाश स्वयं लिंग है। धरती उसका पीठ या आधार है और सब अनन्त शून्य से पैदा हो उसी में लय होने के कारण इसे लिंग कहा है। वातावरण सहित घूमती धरती या सारे अनन्त ब्रह्माण्ड (ब्रह्माण्ड गतिमान है) का अक्स/धुरी ही लिंग है। पुराणों में शिवलिंग को कई अन्य नामों से भी संबोधित किया गया है जैसे- प्रकाश स्तंभ लिंग, अग्नि स्तंभ लिंग, उर्जा स्तंभ लिंग, ब्रह्माण्डीय स्तंभ लिंग आदि। लेकिन बौद्धकाल में धर्म और धर्मग्रंथों के बिगाड़ के चलते लिंग को गलत अर्थों में लिया जाने लगा जो कि आज तक प्रचलन में है।

ज्योतिर्लिंग : ज्योतिर्लिंग उत्पत्ति के संबंध में पुराणों में अनेक मान्यताएं प्रचलित हैं। वेदानुसार ज्योतिर्लिंग यानी 'व्यापक ब्रह्मात्मलिंग' जिसका अर्थ है 'व्यापक प्रकाश'। जो शिवलिंग के 12 खंड हैं। शिवपुराण के अनुसार ब्रह्म, माया, जीव, मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी को ज्योतिर्लिंग या ज्योति पिंड कहा गया है।
 आसमानी पत्थर : ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार विक्रम संवत के कुछ सहस्राब्‍दी पूर्व संपूर्ण धरती पर उल्कापात का अधिक प्रकोप हुआ। आदिमानव को यह रुद्र (शिव) का आविर्भाव दिखा। जहां-जहां ये पिंड गिरे, वहां-वहां इन पवित्र पिंडों की सुरक्षा के लिए मंदिर बना दिए गए। इस तरह धरती पर हजारों शिव मंदिरों का निर्माण हो गया। उनमें से प्रमुख थे 108 ज्योतिर्लिंग।
शिव पुराण के अनुसार उस समय आकाश से ज्‍योति पिंड पृथ्‍वी पर गिरे और उनसे थोड़ी देर के लिए प्रकाश फैल गया। इस तरह के अनेक उल्का पिंड आकाश से धरती पर गिरे थे। कहते हैं कि मक्का का संग-ए-असवद भी आकाश से गिरा था।
हजारों पिंडों में से प्रमुख 12 पिंड को ही ज्‍योतिर्लिंग में शामिल किया गया। हालांकि कुछ ऐसे भी ज्योतिर्लिंग हैं जिनका निर्माण स्वयं भगवान ने किया।
गौरतलब है कि हिन्दू धर्म में मूर्ति की पूजा नहीं होती, लेकिन शिवलिंग और शालिग्राम को भगवान का विग्रह रूप माना जाता है और पुराणों के अनुसार भगवान के इस विग्रह रूप की ही पूजा की जानी चाहिए। शिवलिंग जहां भगवान शंकर का प्रतीक है तो शालिग्राम भगवान विष्णु का।
 'शिव' का अर्थ है- 'परम कल्याणकारी शुभ' और 'लिंग' का अर्थ है- 'सृजन ज्योति'। वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है। यह सूक्ष्म शरीर 17 तत्वों से बना होता है। 1- मन, 2- बुद्धि, 3- पांच ज्ञानेन्द्रियां, 4- पांच कर्मेन्द्रियां और पांच वायु। भ्रकुटी के बीच स्थित हमारी आत्मा या कहें कि हम स्वयं भी इसी तरह है। बिंदु रूप।

लिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और ऊपर प्रणवाख्य महादेव स्थित हैं। केवल लिंग की पूजा करने मात्र से समस्त देवी देवताओं की पूजा हो जाती है। लिंग पूजन परमात्मा के प्रमाण स्वरूप सूक्ष्म शरीर का पूजन है।

शिव पुराण में शिवलिंग की पूजा के विषय में जो तथ्य मिलता है वह तथ्य इस कथा से अलग है। शिव पुराण में शिव को संसार की उत्पत्ति का कारण और परब्रह्म कहा गया है। इस पुराण के अनुसार भगवान शिव ही पूर्ण पुरूष और निराकार ब्रह्म हैं। इसी के प्रतीकात्मक रूप में शिव के लिंग की पूजा की जाती है।
भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठता को लेकर हुए विवाद को सुलझाने के लिए एक दिव्य लिंग (ज्योति) प्रकट किया था। इस लिंग का आदि और अंत ढूंढते हुए ब्रह्मा और विष्णु को शिव के परब्रह्म स्वरूप का ज्ञान हुआ। इसी समय से शिव के परब्रह्म मानते हुए उनके प्रतीक रूप में लिंग की पूजा आरंभ हुई।


महाशिवरात्रि
महाशिवरात्रि पर्व पर अलग-अलग राश‍ि के लोगों के लिए विशेष पूजन के प्रकार का प्रावधान है।
भगवान शिव यूं तो मात्र जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन उनका पूजन अगर अपनी राशि के अनुसार किया जाए तो अतिशीघ्र फल की प्राप्ति होती है।अपनी हर कामना के लिए अलग द्रव्य चढ़ाएं..
मेष राशि- रक्तपुष्प से पूजन करें तथा अभिषेक शहद से करें। ‘ॐ नम: शिवाय’ का जप करें।
वृषभ राशि- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। महामृत्युंजय का मंत्र जपें।
मिथुन राशि- अर्क, धतूरा तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिव चालीसा पढ़ें।
कर्क राशि- श्वेत कमल, पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिवाष्टक पढ़ें।
सिंह राशि- रक्त पुष्प तथा पंचामृत से पूजन-अभिषेक करें। शिव महिम्न स्त्रोत पढ़ें।
कन्या राशि- हरित पुष्प, भांग तथा सुगंधित तेल से पूजन-अभिषेक करें। शिव पुराण में वर्णित कथा का वाचन करें।
तुला राशि- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध धारा से पूजन-‍अभिषेक करें। महाकाल सहस्त्रनाम पढ़ें।
वृश्चिक राशि- रक्त पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव जी के 108 नामों का स्मरण करें।
धनु राशि- पीले पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें।
मकर राशि- नीले-काले पुष्प तथा गंगाजल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव पंचाक्षर मंत्र का जप करें।
कुम्भ राशि- जाम‍ुनिया-नीले पुष्प तथा जल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव षडाक्षर मंत्र का 11 बार स्मरण करें।
मीन राशि- पीले पुष्प तथा मीठे जल से पूजन-‍अभिषेक करें। रावण रचित शिव तांडव का पाठ करें।
 पर्व पर अलग-अलग राश‍ि के लोगों के लिए विशेष पूजन के प्रकार का प्रावधान है।
भगवान शिव यूं तो मात्र जल और बिल्वपत्र से प्रसन्न हो जाते हैं लेकिन उनका पूजन अगर अपनी राशि के अनुसार किया जाए तो अतिशीघ्र फल की प्राप्ति होती है।अपनी हर कामना के लिए अलग द्रव्य चढ़ाएं..
मेष राशि- रक्तपुष्प से पूजन करें तथा अभिषेक शहद से करें। ‘ॐ नम: शिवाय’ का जप करें।
वृषभ राशि- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। महामृत्युंजय का मंत्र जपें।
मिथुन राशि- अर्क, धतूरा तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिव चालीसा पढ़ें।
कर्क राशि- श्वेत कमल, पुष्प तथा दुग्ध से पूजन-अभिषेक करें। शिवाष्टक पढ़ें।
सिंह राशि- रक्त पुष्प तथा पंचामृत से पूजन-अभिषेक करें। शिव महिम्न स्त्रोत पढ़ें।
कन्या राशि- हरित पुष्प, भांग तथा सुगंधित तेल से पूजन-अभिषेक करें। शिव पुराण में वर्णित कथा का वाचन करें।
तुला राशि- श्वेत पुष्प तथा दुग्ध धारा से पूजन-‍अभिषेक करें। महाकाल सहस्त्रनाम पढ़ें।
वृश्चिक राशि- रक्त पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव जी के 108 नामों का स्मरण करें।
धनु राशि- पीले पुष्प तथा सरसों तेल से पूजन-‍अभिषेक करें। 12 ज्योतिर्लिंगों का स्मरण करें।
मकर राशि- नीले-काले पुष्प तथा गंगाजल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव पंचाक्षर मंत्र का जप करें।
कुम्भ राशि- जाम‍ुनिया-नीले पुष्प तथा जल से पूजन-‍अभिषेक करें। शिव षडाक्षर मंत्र का 11 बार स्मरण करें।
मीन राशि- पीले पुष्प तथा मीठे जल से पूजन-‍अभिषेक करें। रावण रचित शिव तांडव का पाठ करें।

भगवान शिव
ज्योतिषीय दृष्टि से चतुदर्शी (1+4) अपने आप में बड़ी ही महत्वपूर्ण तिथि है। इस तिथि के देवता भगवान शिव हैं। जिसका योग 5 हुआ अर्थात्‌ पूर्णा तिथि बनती है, साथ ही कालपुरुष की कुण्डली में पांचवां भाव भक्ति का माना गया है।
—यह करें उपाय कारोबार वृद्धि के लिए—
महाशिवरात्रि के सिद्ध मुहर्त में पारद शिवलिंग को प्राण प्रतिष्ठित करवाकर स्थापित करने से व्यवसाय में वृद्धि व नौकरी में तरक्की मिलती है।
—बाधा नाश के लिए शिवरात्रि के प्रदोष काल में स्फटिक शिवलिंग को शुद्ध गंगा जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर से स्नान करवाकर धूप-दीप जलाकर निम्न मंत्र का जाप करने से समस्त बाधाओं का शमन होता है। ॥ॐ तुत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रूद्र: प्रचोदयात्॥
—-बीमारी से छुटकारे के लिए शिव मंदिर में लिंग पूजन कर दस हज़ार मंत्रों का जाप करने से प्राण रक्षा होती है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करें।
—-शत्रु नाश के लिए शिवरात्रि को रूद्राष्टक का पाठ यथासंभव करने से शत्रुओं से मुक्ति मिलती है। मुक़दमे में जीत व समस्त सुखों की प्राप्ति होती है।
—-मोक्ष के लिए शिवरात्रि को एक मुखी रूद्राक्ष को गंगाजल से स्नान करवाकर धूप-दीप दिखा कर तख्ते पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। शिव रूप रूद्राक्ष के सामने बैठ कर सवा लाख मंत्र जप का संकल्प लेकर जाप आरंभ करें। जप शिवरात्रि के बाद भी जारी रखें। ॐ नम: शिवाय।
—-रुद्राभिशेक से यदि लाभ् लेना चाह्ते है तो जल से रुद्राभिशेक करे ।
—–व्यधि नाश के लिये कुशा से करे ।
—–यदि पशुओ कि कामना चाह्ते है तो दहि से रुद्रभिशेक करे ।
—-यदि लक्ष्मी कि कामना चाह्ते है तो गन्ना के रस से रुद्रभिशेक करे ।
—-अगर आपकी जन्मकुंडली में ” चन्द्र – शनि ” एक ही स्थान पर स्थित है – तो – आपकी कुंडली में ” बिष योग ” का निर्माण हो रहा है – जिससे जीवन में अनेक कष्ट प्राप्त होते है – अतः ” महाशिवरात्रि ” के दिन अपने वज़न के बराबर ” पुडी – पचमेला सब्जी ओर मूली ” का दान करे
शिवरात्रि पर
मेष- इस राशि के लोग शिवलिंग पर कच्चा दूध एवं दही अर्पित करें। इसके साथ ही भोलेनाथ को धतुरा अर्पित करें। कर्पूर जलाकर भगवान की आरती करें।
वृषभ- वृष राशि के लोग किसी भी शिव मंदिर जाएं और भगवान शिव को गन्ने के रस से स्नान करवाएं। इसके बाद मोगरे का ईत्र शिवलिंग पर अर्पित करें। अंत में भगवान को मिठाई का भोग लगाएं एवं आरती करें।
मिथुन- आप स्फटिक के शिवलिंग की पूजा करेंगे तो सर्वश्रेष्ठ रहेगा। यदि स्फटिक का शिवलिंग उपलब्ध न हो तो किसी अन्य शिवलिंग का पूजन किया जा सकता है। इस दिन मिथुन राशि के लोग लाल गुलाल, कुमकुम, चंदन, ईत्र आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। आक के फूल अर्पित करें। मीठा भोग लगाकर आरती करें।
कर्क- इस राशि के लोग अष्टगंध एवं चंदन से शिवजी का अभिषेक करें। आटे से बनी रोटी का भोग लगाकर शिवलिंग का पूजन करें। बैर अर्पित करें।
सिंह- इस राशि के लोगों को फलों के रस के साथ, पानी में चीनी घोलकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही शिवजी को आक के पुष्प अर्पित कर मीठा भोग लगाएं।
कन्या- आप महादेव को बैर, धतुरा, भांग और आक के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही बिल्व पत्र पर नैवेद्य रखकर अर्पित करें। कर्पूर मिश्रित जल से अभिषेक कराएं।
तुला- तुला राशि के लोग जल में अलग-अलग फूल डालकर, उस जल से शिवजी का अभिषेक करें। इसके बाद बिल्व पत्र, मोगरा, गुलाब, चावल, चंदन आदि भोलेनाथ को अर्पित करें। अंत में आरती करें।
वृश्चिक- इन लोगों को शुद्ध जल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए। शहद, घी से स्नान कराने पश्चात पुन: जल से स्नान कराएं एवं पूजन कर आरती करें।
धनु- धनु राशि के लोग शिवजी को सूखे मेवे का भोग लगाएं। बिल्व पत्र, गुलाब आदि अर्पित करके आरती करें।
मकर- आप गेहूं लेकर किसी शिव मंदिर जाएं। वहां गेंहू से शिवलिंग को ढंककर, विधिवत पूजन करें। पूजन-आरती पूर्ण होने के बाद गेंहू का दान कर दें। इस उपाय से आपकी सभी समस्याएं समाप्त हो जाएंगी।
कुंभ- ये लोग सफेद और काले तिल एक साथ किसी ऐसे शिवलिंग पर चढाएं, जो एकांत में हो। शिवलिंग पर तिल चढ़ाने से पहले जल अर्पित करें। इसके बाद काले-सफेद तिल अर्पित करें, पूजन के आद आरती करें।
मीन- इस राशि के लोगों को किसी ऐसे शिवलिंग का पूजन करना चाहिए जो पीपल के नीचे स्थित हो। यदि आपके घर के आसपास ऐसा शिवलिंग न हो तो किसी पीपल के नीचे स्वयं छोटा सा शिवलिंग स्थापित कर पूजन करें। ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हुए बिल्व पत्र चढ़ाएं तथा आरती करें।
शिव पूजा
सभी राशि के लोग शिव पूजा किसी भी विधि से कर सकते हैं, लेकिन यहां बताए जा रहे शिव पूजा के खास उपाय शिवरात्रि के अलावा हर शाम भी मंगलकारी व असरदार सिद्ध होंगे। अगली स्लाइड्स पर जानिए, शिवरात्रि की शाम व रात में अपने नाम के मुुताबिक किस राशि के व्यक्ति पर कौन से विशेष शिव पूजा उपाय व मंत्र से महालक्ष्मी की प्रसन्नता सुख-सौभाग्य बरसाएगी-
सबसे पहले हर राशि का व्यक्ति शिव पूजन से पहले काले तिल जल में मिलाकर स्नान करे। शिव पूजा में कनेर, मौलसिरी और बेलपत्र जरूर चढ़ावें। इसके अलावा जानिए कि किस राशि के व्यक्ति को किस पूजा सामग्री से शिव पूजा शुभ व मनचाहे फल देती है -
मेष – इस राशि के व्यक्ति जल में गुड़ मिलाकर शिव का अभिषेक करें। शक्कर या गुड़ की मीठी रोटी बनाकर शिव को भोग लगाएं। लाल चंदन व कनेर के फूल चढ़ावें। इस नाम राशि वाल शिव भक्तों के लिए यह शिव मंत्र मंगलकारी व लक्ष्मी कृपा बरसाने वाला होता है-
शिव मंत्र – ॐ पशुपतये नम:
वृष- इस राशि के लोगों के लिए दही से शिव का अभिषेक शुभ फल देता है। इसके अलावा चावल, सफेद चंदन, सफेद फूल और अक्षत यानी चावल चढ़ावें व इस शिव मंत्र का ध्यान करें -
शिव मंत्र – ॐ शर्वाय नम:
मिथुन – इस राशि का व्यक्ति गन्ने के रस से शिव अभिषेक करे। अन्य पूजा सामग्रियों में मूंग, दूर्वा और कुशा भी अर्पित करें। इस शिव मंत्र का स्मरण करें-
शिव मंत्र – ॐ विरूपाक्षाय नम:
कर्क – इस राशि के शिवभक्त घी से भगवान शिव का अभिषेक करें। साथ ही कच्चा दूध, सफेद आंकड़े का फूल और शंखपुष्पी भी चढ़ावें। यथाशक्ति इस शिव मंत्र का जप मन ही मन करें -
शिव मंत्र – ॐ महेश्वराय नम:
सिंह – सिंह राशि के व्यक्ति गुड़ के जल से शिव अभिषेक करें। वह गुड़ और चावल से बनी खीर का भोग शिव को लगाएं। गेहूं और मंदार के फूल भी चढ़ाएं और इस शिव मंत्र को बोलें -
शिव मंत्र – ॐ अघोराय नम:
कन्या – इस राशि के व्यक्ति गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें। शिव को भांग, दुर्वा व पान चढ़ाकर यह शिव मंत्र कम से कम 108 बार जरूर बोलें -
शिव मंत्र – ॐ त्र्यम्बकाय नम:
तुला – इस राशि के जातक इत्र या सुगंधित तेल से शिव का अभिषेक करें और दही, शहद और श्रीखंड का प्रसाद चढ़ाएं। सफेद फूल भी पूजा में शिव को अर्पित करें। यह शिव मंत्र भी स्मरण कर सौभाग्य की कामना करें -
शिव मंत्र – ॐ ईशानाय नम:
वृश्चिक – पंचामृत से शिव का अभिषेक वृश्चिक राशि के जातकों के लिए शीघ्र फल देने वाला माना जाता है। साथ ही लाल फूल भी शिव को जरुर चढ़ाएं व इस शिव मंत्र से लक्ष्मी कृपा की कामना करें-
शिव मंत्र – ॐ विश्वरूपिणे नम:
धनु – इस राशि के जातक दूध में हल्दी मिलाकर शिव का अभिषेक करे। भगवान को चने के आटे और मिश्री से मिठाई तैयार कर भोग लगाएं। पीले या गेंदे के फूल पूजा में अर्पित करें। इस नाम राशि वालों के लिए यह शिव मंत्र शुभ फल देता है -
शिव मंत्र – ॐ शूलपाणये नम:
मकर – नारियल के पानी से शिव का अभिषेक मकर राशि के जातकों को विशेष फल देता है। साथ ही उड़द की दाल से तैयार मिष्ठान्न का भगवान को भोग लगाएं। नीले कमल का फूल भी भगवान का चढ़ाएं। दरिद्रता दूर रखने के लिए इस नाम राशि वाले भक्त यह शिव मंत्र मन ही मन बोलें -
शिव मंत्र – ॐ भैरवाय नम:
कुंभ – इस राशि के व्यक्ति को तिल के तेल से अभिषेक करना चाहिए। उड़द से बनी मिठाई का भोग लगाएं और शमी के फूल से पूजा में अर्पित करें। यह शनि पीड़ा को भी कम करता है। यह शिव मंत्र बोलने से इस नाम राशि के भक्त खूब फलते-फूलते हैं -
शिव मंत्र – ॐ कपर्दिने नम:
मीन – इस राशि के जातक दूध में केशर मिलाकर शिव पर चढ़ाएं। भात और दही मिलाकर भोग लगाएं। पीली सरसों और नागकेसर से शिव का चढ़ाएं। यह शिव मंत्र इस नाम राशि वालों के लिए मंगलकारी होता है-
शिव मंत्र – ॐ सदाशिवाय नम:
ज्योतिषशास्त्र के प्राचीन प्रमुख ग्रंथ बृहत्पाराशरहोराशास्त्र में विभिन्न ग्रहों की दशा-अंतर्दशा में बनने वाले अनिष्टकारक योग की निवृत्ति के लिए(शांति हेतु) शिवार्चन और रुद्राभिषेक का परामर्श दिया गया है... भृगुसंहितामें भी जन्मपत्रिका का फलादेश करते समय महर्षि भृगु अधिकांश जन्मकुंडलियों में जन्म-जन्मांतरों के पापों और ग्रहों की पीडा के समूल नाश एवं नवीन प्रारब्ध के निर्माण हेतु महादेव शंकर की आराधना तथा रुद्राभिषेक करने का ही निर्देश देते हैं... किसी कामना से किए जाने वाले रुद्राभिषेक में शिव-वास का विचार करने पर अनुष्ठान अवश्य सफल होता है और मनोवांछित फल प्राप्त होता है... प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की प्रतिपदा (1), अष्टमी (8), अमावस्या तथा शुक्लपक्ष की द्वितीया (2) व नवमी (9) के दिन भगवान शिव माता गौरी के साथ होते हैं, इस तिथि में रुद्राभिषेक करने से सुख-समृद्धि उपलब्ध होती है... कृष्णपक्ष की चतुर्थी (4), एकादशी (11) तथा शुक्लपक्ष की पंचमी (5) व द्वादशी (12) तिथियों में भगवान शंकर कैलास पर्वत पर होते हैं और उनकी अनुकंपा से परिवार में आनंद-मंगल होता है... कृष्णपक्ष की पंचमी (5), द्वादशी (12) तथा शुक्लपक्ष की षष्ठी (6) व त्रयोदशी (13) तिथियों में भोलेनाथ नंदी पर सवार होकर संपूर्ण विश्व में भ्रमण करते हैं... अत:इन तिथियों में रुद्राभिषेक करने पर अभीष्ट सिद्ध होता है...कृष्णपक्ष की सप्तमी (7), चतुर्दशी (14) तथा शुक्लपक्ष की प्रतिपदा (1), अष्टमी (8), पूíणमा (15) में भगवान महाकाल श्मशान में समाधिस्थ रहते हैं अतएव इन तिथियों में किसी कामना की पूíत के लिए किए जाने वाले रुद्राभिषेक में आवाहन करने पर उनकी साधना भंग होगी... इससे यजमान पर महाविपत्ति आ सकती है... कृष्णपक्ष की द्वितीया (2), नवमी (9) तथा शुक्लपक्ष की तृतीया (3) व दशमी (10) में महादेवजी देवताओं की सभा में उनकी समस्याएं सुनते हैं... इन तिथियों में सकाम अनुष्ठान करने पर संताप (दुख) मिलेगा... कृष्णपक्ष की तृतीया (3), दशमी (10) तथा शुक्लपक्ष की चतुर्थी (4) व एकादशी (11) में नटराज क्रीडारत रहते हैं... इन तिथियों में सकाम रुद्रार्चन संतान को कष्ट दे सकता है... कृष्णपक्ष की षष्ठी (6), त्रयोदशी (13) तथा शुक्लपक्ष की सप्तमी (7) व चतुर्दशी (14) में रुद्रदेव भोजन करते हैं... इन तिथियों में सांसारिक कामना से किया गया रुद्राभिषेक पीडा दे सकता है...
यह ध्यान रहे कि शिव-वास का विचार सकाम अनुष्ठान में ही जरूरी है... निष्काम भाव से की जाने वाली अर्चना कभी भी हो सकती है... ज्योतिíलंग-क्षेत्र एवं तीर्थस्थान में तथा शिवरात्रि-प्रदोष, सावन के सोमवार आदि पर्वो में शिव-वास का विचार किए बिना भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है... वस्तुत:शिवलिंग का अभिषेक आशुतोष शिव को शीघ्र प्रसन्न करके साधक को उनका कृपापात्र बना देता है और तब उसकी सारी समस्याएं स्वत:समाप्त हो जाती हैं... दूसरे शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि रुद्राभिषेक से सारे पाप-ताप-शाप धुल जाते हैं...

 लिंग विविध द्रव्यों के बनाए जाते हैं। गरुण पुराण में इसका अच्छा विस्तार है। उसमें से कुछ का संक्षेप में परिचय इस प्रकार है-


    गंधलिंग दो भाग कस्तूरी, चार भाग चंदन और तीन भाग कुंकुम से बनाए जाते हैं। शिवसायुज्यार्थ इसकी अर्चना की जाती है।

    पुष्पलिंग विविध सौरमय फूलों से बनाकर पृथ्वी के आधिपत्य लाभ के लिए पूजे जाते हैं।
    गोशकृल्लिंग, स्वच्छ कपिल वर्ण की गाय के गोबर से बनाकर पूजने से ऐश्वर्य मिलता है। अशुद्ध स्थान पर गिरे गोबर का व्यवहार वर्जित है।
    बालुकामयलिंग, बालू से बनाकर पूजने वाला विद्याधरत्व और फिर शिवसायुज्य प्राप्त करता है।
    यवगोधूमशालिजलिंग, जौ, गेहूं, चावल के आटे का बनाकर श्रीपुष्टि और पुत्रलाभ के लिए पूजते हैं।
    सिताखण्डमयलिंग मिस्त्री से बनता है, इसके पूजन से आरोग्य लाभ होता है।
    लवणजलिंग हरताल, त्रिकटु को लवण में मिलाकर बनता है। इससे उत्तम प्रकार का वशीकरण होता है।
    तिलपिष्टोत्थलिंग तिल को पीसकर उसके चूर्ण से बनाया जाता है।
    भस्मयलिंग सर्वफलप्रद है, गुडोत्थलिंग प्रीति बढ़ाने वाला है और शर्करामयलिंग सुखप्रद है।
    वंशांकुरमय (बांस के अंकुर से निर्मित) लिंग वंशकर है।
    पिष्टमय विद्याप्रद और दधिदुग्धोद्भवलिंग कीर्ति, लक्ष्मी और सुख देता है।
    धान्यज धान्यप्रद, फलोत्थ फलप्रद, धात्रीफलजात मुक्तिप्रद, नवनीतज कीर्ति और सौभाग्य देता है।
    दूर्वाकाण्डज अपमृत्युनाशक, कर्पूरज मुक्तिप्रद, अयस्कांतमणिज सिद्घिप्रद, मौक्तिक सौभाग्यकर स्वर्णनिर्मित महामुक्तिप्रद, राजत भूतिवर्धक है।
    पित्तलज और कांस्यज मुक्तिद, त्रपुज, आयस और सीसकज शत्रुनाशक होते हैं। अष्टधातुज सर्वसिद्घिप्रद, अष्टलौहजात कुष्ठनाशक, वैदूर्यज शत्रुदर्पनाशक और स्फटिकलिंग सर्वकामप्रद हैं।

मिट्टी और गऊ गोबर से बनाएं पार्थिव लिंग
महाराज अवधेश वाणी महाराज ने बताया कि कलयुग में सबसे पहले पार्थिव पूजन कूष्माड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया। प्रभु के आदेश पर जगत के कल्याण के लिए उन्होंने पार्थिव लिंग बनाकर शिव अर्चन किया। उन्होंने बताया कि शिव अर्चन दौरान उत्तराभिमुख होकर पूजन करें। रुद्राक्ष धारण कर भस्म लगाए। भस्म नहीं मिलने पर मिट्टी का त्रिपुंड माथे पर लगा सकते हैं।
मिट्टी और गऊ गोबर से बनाएं पार्थिव लिंग
अवधेश वाणी महाराज ने बताया कि पूजन करने से पहले पार्थिव लिंग का निर्माण करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गऊ का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाए। शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से ऊंचा नहीं हो। इससे अधिक ऊंचा होने पर पार्थिव लिंग पूजन का पुण्य प्राप्त नहीं होता है। इसे बनाने के बाद ऊँ शिवाय नम: मंत्र से शिवार्चना करनी चाहिए।
मनोकामना पूर्ति को चढ़ाए तीन सेर भोग
भक्तों को मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग पर तीन सेर प्रसाद चढ़ाना चाहिए। साथ ही इस बात का ध्यान रहे कि जो प्रसाद शिवलिंग से स्पर्श कर जाए, उसे ग्रहण नहीं करें। इसके लिए शिवलिंग स्पर्श से दूर प्रसाद को ग्रहण करें।
पूजन सामग्री
दूध, दही, बूरा, शहद, घी अभिषेक के लिए। गंगाजल, चंदन, कमल गट्टे, काले तिल, साठी के चावल, धूप, जौ, बेल पत्र, भांग, धतूरा, मदार पुष्प, समी पत्र, अर्पण करें। इसके बाद भोले बाबा की आरती करें। अंत में बर्फी, खीर या बताशों से भोग लगाकर क्षमा याचना करें।

हर इच्छा पूरी हो तो महाशिवरात्रि
 अगर आप चाहते हैं कि आपकी हर इच्छा पूरी हो तो महाशिवरात्रि के दिन अपनी राशि के अनुसार उपाय करें-
मेष- इस राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन जल में गुड़ मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। यदि ये न कर पाएं तो जल में कुंकुम मिलाकर भी भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं। शिव पंचाक्षर मंत्र का जप करें।
वृषभ- इस राशि के लोगों के लिए दही से भगवान शिव का अभिषेक शुभ फल देता है। इससे धन संबंधी समस्या का निदान होता है। साथ ही भगवान शिव की स्तुति करें व बिल्व पत्र भी चढ़ाएं तो और जल्दी फल प्राप्त होगा।
मिथुन- इस राशि का लोग गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक महाशिवरात्रि के दिन करें तो जल्दी ही उसकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगी। भगवान शिव को धतूरा भी चढ़ाएं।
कर्क- इस राशि के शिवभक्त अपनी राशि के अनुसार शक्कर मिला हुआ दूध भगवान शिव को चढ़ाएं। साथ ही आंकड़े के फूल भी अर्पित करें।
सिंह- सिंह राशि के लोग लाल चंदन के जल से शिव जी का अभिषेक करें तथा शिव अमृतवाणी सुनें। इससे इनकी हर मनोकामना पूरी होगी।
कन्या- इस राशि के लोगों को विजया(भांग) मिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। इससे यदि इन्हें कोई रोग होगा तो वह समाप्त हो जाएगा।
तुला- इस राशि के लोग भगवान शिव का गाय के घी में इत्र मिलाकर अभिषेक करें। साथ ही केसर मिश्रित मिठाई का भोग भी लगाएं। इससे इनके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी।
वृश्चिक- शहद मिश्रित जल से भगवान शिव का अभिषेक वृश्चिक राशि के लोगों के लिए शीघ्र फल देने वाला माना जाता है। शहद न हो तो शक्कर का उपयोग भी कर सकते हैं।
धनु- इस राशि के लोगों को दूध में केसर मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। साथ ही शिव पंचाक्षर स्त्रोत का पाठ भी करना चाहिए।
मकर- आप अपनी राशि के अनुसार तिल्ली के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करें तो आपको हर काम में सफलता मिलेगी। भगवान शिव को बिल्व पत्र भी चढ़ाएं।
कुंभ- इस राशि के व्यक्तियों को महाशिवरात्रि के दिन नारियल के पानी या सरसों के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। इससे इन्हें धन लाभ होगा।
मीन- इस राशि के लोग महाशिवरात्रि के दिन पानी में केसर मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। धन संबंधी सभी समस्याएं दूर हो जाएंगी।
महाशिरा‍त्रि अभिषेक
राशियों के अनुसार करें महाशिरा‍त्रि अभिषेक
मेष- शहद, गु़ड़, गन्ने का रस। लाल पुष्प चढ़ाएं।
वृष- कच्चे दूध, दही, श्वेत पुष्प।
मिथुन- हरे फलों का रस, मूंग, बिल्वपत्र।
कर्क- कच्चा दूध, मक्खन, मूंग, बिल्वपत्र।
सिंह- शहद, गु़ड़, शुद्ध घी, लाल पुष्प।
कन्या- हरे फलों का रस, बिल्वपत्र, मूंग, हरे व नीले पुष्प।
तुला- दूध, दही, घी, मक्खन, मिश्री।
वृश्चि- शहद, शुद्ध घी, गु़ड़, बिल्वपत्र, लाल पुष्प।
धनु- शुद्ध घी, शहद, मिश्री, बादाम, पीले पुष्प, पीले फल।
मकर- सरसों का तेल, तिल का तेल, कच्चा दूध, जामुन, नीले पुष्प।
कुंभ- कच्चा दूध, सरसों का तेल, तिल का तेल, नीले पुष्प।
मीन- गन्ने का रस, शहद, बादाम, बिल्वपत्र, पीले पुष्प, पीले फल।
     mahamrutyunjay mntr          
     महामृत्युंजयमंत्र


शिवपुराण में बताया गया है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने का सर्वश्रेष्ठ मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र। इस मंत्र के मात्र जप से ही सभी बीमारियों और कष्टों का निवारण हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति मृत्यु के करीब है और इसके नाम से महामृत्युंजय मंत्र का जप कराया जाए तो वह पूर्ण स्वस्थ हो सकता है।
ये है महामृत्युंजय मंत्र: ऊँ त्र्यम्बकं यहामहे सुगन्धिं पुष्टिवद्र्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मुत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।                                        शिव  को प्रसन्न  करने के  सरल उपाय
शिव भोले  नाथ  है  आप किसी एक उपाय  को  अपनी  सुविधा प्रयोग  करते  रहे  कुछ  समय  बाद  आपको उसका फल  मिलने लगे लगेगा|
 दुर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।  धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है। लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
 दुर्वा से पूजन करने पर आयु बढ़ती है।  धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है। लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है।
शमी पत्रों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है। बेला के फूल सेपूजन करने पर शुभ लक्षणों से युक्त पत्नी मिलती है।
 चन्द्र ग्रह  की शांति  के लिए शक्कर मिश्रित दूध भगवान शिव को चढ़ाएं। सुगंधित तेल से शिव का अभिषेक करने पर समृद्धि में वृद्धि होती है।
 भगवान शिव पर ईख (गन्ना) के रस की धारा चढ़ाई जाए तो सभी आनन्दों की प्राप्ति होती है। शिव को गंगाजल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति
 मधु(शहद) की धारा शिव पर चढ़ाने से धन सम्वन्धी  बाधा दूर होती है
 लाल व सफेद आंकड़े के फूल से शिव का पूजन करने पर भोग व मोक्ष की प्राप्ति होती है
 धतूरे के पुष्प के पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है। लाल डंठलवाला धतूरा पूजन में शुभ माना गया है। 


मंत्र जाप से कैसे करें शिव को प्रसन्न
देवों के देव महादेव ऐसे होंगे प्रसन्न
* किस मंत्र के जाप से शिव जी होंगे प्रसन्न
* भगवान शंकर जी के सरल मंत्र
मंत्र जाप
देवों के देव महादेव के ‍विशेष मंत्रों के जाप से उनकी कृपा शीघ्र प्राप्त होती है, जिससे साधक अपनी कामना की पूर्ति करके जीवन में सफलता-सुख-शांति प्राप्त करता है।
प्रस्तुत है कुछ ऐसे विशेष मंत्र हैं जिनका शिवरात्रि से लेकर प्रतिदिन रुद्राक्ष की माला से जप करने से सुख, अपार धन संपदा, अखंड सौभाग्य और प्रसन्नता में वृद्धि होती है।
मंत्रों का जाप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। जप के पूर्व शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करना चाहिए। उनके ऊपर जलधारा अर्पित करना चाहिए।
निम्नानुसार मंत्र जाप करके आप शिव कृपा को पात्र कर सकते हैं : -
* ॐ नमः शिवाय।
* प्रौं ह्रीं ठः।
* ऊर्ध्व भू फट्।
* इं क्षं मं औं अं।
* नमो नीलकण्ठाय।
* ॐ पार्वतीपतये नमः।
* ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
* ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा।

 जानिए, काल को भी टालने वाले महामृत्युञ्जय मंत्र ध्यान का आसान तरीका
धर्म डेस्क |
जानिए, काल को भी टालने वाले महामृत्युञ्जय मंत्र ध्यान का आसान तरीका
उज्जैन। भगवान शिव महामृत्युञ्जय कहलाते हैं। शिव का यह रूप काल को पराजित करने या नियंत्रण करने वाले देवता के रूप में पूजित है। महामृत्युञ्जय की आराधना का निरोग होने, मौत को टालने या मृत्यु के समान दु:खों का अंत करने में बहुत महत्व है।
शास्त्रों में महामृत्युञ्जय की उपासनाके लिए महामृत्युञ्जय मंत्र के जप का बहुत महत्व बताया गया है। इस महामृत्युञ्जय मंत्र का जप दैनिक जीवन में कोई भी व्यक्ति कर सकता है। लेकिन खास तौर पर जब कोई व्यक्ति रोग से पीडि़त हो या मानसिक अशांति या भय, बाधाओं से घिरा हो, तब इस मंत्र की साधना पीड़ानाशक मानी गई है।
शास्त्रों में इस मंत्र के जप के विधि-विधान का पालन साधारण व्यक्ति के लिए कभी-कभी कठिन हो जाता है। हालांकि किसी योग्य ब्राह्मण से इस मंत्र का जप कराया जाना अधिक सुफल देने वाला होता है। फिर भी अगर किसी विवशता के चलते विधिवत मंत्र जप करना संभव न हो तो यहां बताया जा रहा है महामृत्युञ्जय जप का आसान उपाय। इसका श्रद्धा और आस्था के साथ पालन निश्चित रूप से कष्टों में राहत देगा-
 - इस मंत्र का जप यथासंभव रोग या कष्ट से पीडि़त व्यक्ति द्वारा करना अधिक फलदायी होता है।
- ऐसा संभव न हो तो रोगी या पीडि़त व्यक्ति के परिजन इस मंत्र का जप करें।
- मंत्र जप के लिए जहां तक संभव हो सफेद कपड़े पहने और आसन पर बैठें। मंत्र जप रूद्राक्ष की माला से करें।
- महामृत्युञ्जय मंत्र जप शुरू करने के पहले यह आसान संकल्प जरूर करें- मैं (जप करने वाला अपना नाम बोलें) महामृत्युञ्जय मंत्र का जप (स्वयं के लिए या रोगी का नाम) की रोग या पीड़ा मुक्ति या के लिए कर रहा हूं। महामृत्युञ्जय देवता कृपा कर प्रसन्न हो रोग और पीड़ा का पूरी तरह नाश करे।
- कम से कम एक माला यानि 108 बार इस मंत्र का जप अवश्य करें।
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌।
- मंत्र जप पूरे होने पर क्षमा प्रार्थना और पीड़ा शांति की कामना करें।
 शास्त्रों के मुताबिक भगवान शिव संहारकर्ता ही नहीं, कल्याण करने वाले देवता भी है। इस तरह शिव का काल और जीवन दोनों पर नियंत्रण है। यही वजह है कि व्यावहारिक जीवन में सुखों की कामनापूर्ति के लिए ही नहीं दु:खों की घड़ी में शिव का स्मरण किया जाता है।
शिव की भक्ति से दु:ख, रोग और मृत्यु के भय से छुटकारा पाने का सबसे प्रभावी उपाय है- महामृत्युंजय मंत्र का जप। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र जप से न केवल व्यक्तिगत संकट बल्कि पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्रीय आपदाओं और त्रासदी को भी टाला जा सकता है। यहां जानिए इनके अलावा भी कैसे विपरीत हालात या बुरी घड़ियों में भी इस मंत्र का जप जरूर करना चाहिए-
- विवाह संबंधों में बाधक नाड़ी दोष या अन्य कोई बाधक योग को दूर करने में।
- जन्म कुण्डली में ग्रह दोष, ग्रहों की महादशा या अंर्तदशा के बुरे प्रभाव की शांति के लिए।
- संपत्ति विवाद सुलझाने के लिए।
- महामारी के प्रकोप से बचने के लिए।
- किसी लाइलाज गंभीर रोग की पीड़ा से मुक्ति के लिए।
- देश में अशांति और अलगाव की स्थिति बनी हो।
- प्रशासनिक परेशानी दूर करने के लिए।
- वात, पित्त और कफ के दोष से पैदा हुए रोगों की निदान के लिए।
- परिवार, समाज और करीबी संबंधों में घुले कलह को दूर करने के लिए।
- मानसिक क्लेश और संताप के कारण धर्म और अध्यात्म से बनी दूरी को खत्म करने के लिए।
- दुर्घटना या बीमारी से जीवन पर आए संकट से मुक्ति के लिए।

ज्योतिष :शीघ्र विवाह एवं विवाह में रुकावट दूर करने के उपाय / टोटके :Astrology ;:Remedy for early marriage


शीघ्र विवाह एवं विवाह में रुकावट दूर करने के उपाय / टोटके
  •  गुरूवार :को नहाने वाले पानी में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए|
  • केसर: टीका लगाना चाहिए|  
  • बजुर्ग व्यक्तियों: सम्मानकरें|
  •  शीघ्र विवाह: सोमवार को  चने की दाल ,कच्चा दूध दान करें|
  •  बुध :रूकावट दे रहा हो को हरी घास उपाय करे |
  • गुरूवार :को पीपल,केले के वृक्ष पर जल अर्पित करने से विवाह बाधा दूर |
  •  बृहस्पति देव:प्रसन्न करने के लिए पीले रंग की वस्तुएं जैसे हल्दी, पीला फल, पीले रंग का वस्त्र, पीले फूल, केला, चने की दाल आदि  गुरु ग्रह को चढ़ानी चाहिए। 
  •  गुरुवार के दिन व्रत रखना चाहिए। 
  •   ऊँ ग्रां ग्रीं ग्रों स: मंत्र का माला प्रति गुरुवार जप करें।
      शिव-पार्वती का पूजन करना 
    चाहिए।  
  •  शिवलिंग पर कच्चा दूध, बिल्व पत्र, अक्षत, कुमकुम आदि चढ़ाकर विधिवत पूजन करें।
  •  जल्दी शादी  उपाय: 
  • किसी ग्रह बाधा उपाय करें।
     सूर्य:प्रतिदिन सूर्य को जल चढ़ाएं और
    मंत्र: ऊँ सूर्याय: नम:  का जप करें।
      मंगल :विलंब होने पर चांदी का चौकोर टुकड़ा सदैव अपने पास रखें।  
  • सूर्य : विवाह प्रस्ताव के जाते समय थोड़ा गुड़ खाकर और पानी पीकर जाना चाहिए।
 जन्म कुण्डली से  जाने: विवाह ,शादी  का समय :ग्रहों की दशा- अन्तर्दशा में विवाह हो सकता है |  विवाह में सहायक ग्रह, उसकी दशांतर्दशा एवं गोचर पर निर्भर करता है।
२ ,५ ,७ ,९ ,११ भाव ,और उनके लॉर्ड्स को भी देखना होता है।
 सप्तम या सप्तम से सम्बन्ध रखने वाले ग्रह की महादशा या अन्तर्दशा में विवाह होता है।
कन्या की कुन्डली में शुक्र से सप्तम और पुरुष की कुन्डली में गुरु से सप्तम की दशा में या अन्तर्दशा में विवाह होता है।
सप्तमेश की महादशा में, पुरुष के कुंडली मैं ,शुक्र या चन्द्र की अन्तर्दशा में और स्त्री के कुंडली मैं गुरु या मंगल की अन्तर्दशा में विवाह होता है।
सप्तमेश जिस राशि में हो,उस राशि के स्वामी के त्रिकोण में गुरु के आने पर विवाह होता है।
गुरु गोचर से सप्तम में या लगन में या चन्द्र राशि में या चन्द्र राशि के सप्तम में आये तो विवाह होता है।
सप्तमेश जब गोचर से शुक्र की राशि में आये और गुरु से सम्बन्ध बना ले तो विवाह सम्बन्ध बनता है।
 इसलिए सप्तम भाव के स्वामी, स्प्तम भाव के कारक अर्थात विवाह के कारक (स्त्री के लिए गुरु और पुरुष क लिए शुक्र), सप्तम भाव म बैठ ग्रह, सप्तम भाव पर दृष्टि रखने वाले ग्रह,
 दशाओं में सप्तमेश ,लग्नेश ,गुरु एवम विवाह कारक शुक्र का गोचर जब लग्न ,सप्तम भाव या इनसे त्रिकोण में होता है उस समय विवाह का योग 

बनता है |
  चंद्र, गुरु अथवा शुक्र की दशाओं में भी विवाह हो सकता है।

राहु की दशा में विवाह हो सकता है। 
सप्तमेश जिस राशि में बैठा हो उसके स्वामी ग्रह की दशा में विवाह हो सकता है।
 द्वितीयेश की दशा में अथवा द्वितीयेश जिस राशि में स्थित हो उसके स्वामी की दशा में विवाह होता है।
 सप्तमेश राहु या केतु से युत हो तो इनकी दशा भुक्ति में विवाह होता है। नवमेश और दशमेश की दशा में विवाह होता है।
 सप्तमेश में नवमेश की दशा- अन्तर्द्शा में विवाह हो सकता है।
 सप्तमेश की दशा- अन्तर्दशा में विवाह   हो सकता है।
सप्तमेश  नवमेश पंचमेश  आपस से भी संबन्ध बनाते हों तो इस ग्रह दशा में प्रेम विवाह हो   सकता है|
सप्तम भाव में स्थित ग्रहों की दशा– अन्तर्दशा में विवाह  हो सकता है।  शुक्र, सप्तम भाव में स्थित ग्रह या सप्तमेश जब शुभ ग्रह होकर अशुभ भाव या अशुभ ग्रह की राशि में स्थित होने पर अपनी दशा- अन्तर्दशा के  में विवाह की संभावनाएं हो सकती है|
इसके अतिरिक्त जब अशुभ ग्रह बली होकर सप्तम भाव में स्थित हों या स्वयं सप्तमेश हों तो इस ग्रह की दशा के  अन्तिम भाग में विवाह
जब विवाह कारक ग्रह शुक्र  गोचर में शनि, गुरु से संबन्ध बनाने पर अपनी दशा- अन्तर्दशा में विवाह हो  सकता   है|
सप्तमेश के मित्रों की ग्रह दशा में विवाह होने के योग बनते है|
सप्तम व सप्तमेश से दृ्ष्ट ग्रहों की दशा में विवाह होने के योग बनते है|
लग्नेश की दशा में सप्तमेश की अन्तर्दशा में भी विवाह होने की संभावनाएं बनती है|
शुक्र शुभ ग्रह की राशि तथा शुभ भाव (केन्द्र, त्रिकोण) में स्थित हों, तो शुक्र कि अन्तर्दशा या प्रत्यन्तर दशा से आने पर विवाह हो सकता है.
शुक्र से युति करने वाले ग्रहों की दशा- अन्तर्दशा में विवाह होने की संभावनाएं बनती है|